थाजल/उरी। सरहद पार के प्यार के सैकड़ों किस्से सामने आते एवं मीडिया पर सुर्खियां बटोरते रहे हैं और इसी कड़ी में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से ऐसे ही एक प्रेमी युवक के नियंत्रण रेखा पार कर जम्मू कश्मीर में उरी सेक्टर के थाजल गांव अपनी प्रेयसी के पास पहुंचने का मामला सामने आया है।
ऐसा एक वाकया उस समय सामने आया जब पीओके से एक तथाकथित घुसपैठिया जम्मू कश्मीर में बारामूला जिले के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय सीमा में पहुंचा। जांचकर्ताओं ने बताया कि यह मामला घुसपैठ की आम घटनाओं जैसा नहीं है बल्कि यह प्यार की एक ऐसी कहानी है जिसने 22 साल के युवक को अपनी महबूबा से मिलने के लिए दुनिया की सबसे अधिक सुरक्षा वाली सीमाओं में से एक को पार करने को मजबूर कर दिया।
पीओके में मुजफ्फराबाद के पैनकडी निवासी 22 साल के जीशान अहमद मीर को सेना के जवानों ने उरी सेक्टर में भारतीय सीमा में पहुंचते ही पकड़ लिया। उसका सफर हालांकि हिरासत और पूछताछ पर खत्म हुआ लेकिन जांचकर्ताओं का कहना है कि उसके सीमा पार करने के हालात एक बेहद निजी कहानी की ओर इशारा करते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जीशान को भारतीय सीमा में घुसने के तुरंत बाद सिलिकोट के पास पकड़ा गया, जो नियंत्रण रेखा पर बसा एक सुरक्षित गांव है। उसने सेना को बताया कि वह इरम बानो नाम की उस युवती से मिलने आया था, जो उसकी दूर की एक रिश्तेदार है और जिससे वह पिछले एक साल से ऑनलाइन चैटिंग कर रहा था। उनकी ऑनलाइन दोस्ती धीरे-धीरे एक ऐसे रिश्ते में बदल गई, जो दूरी और उनके बीच की मुश्किल सीमा के बावजूद कायम रही।
पीओके की पहाड़ी ढलानों पर पाकिस्तानी सेना की चौकियों से एक किलोमीटर से अधिक दूर बसे थाजल गांव की रहने वाली इरम ने कहा कि वे दोनों सोशल मीडिया के जरिए लगातार संपर्क में थे। जीशान अक्सर एक दिन कानूनी तरीके से आने की बात करता था। उसने मुझे बताया था कि वह वीजा लेकर आयेगा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह इतना खतरनाक रास्ता अपनाएगा।
जीशान ने 31 मई की सुबह जब नियंत्रण रेखा पार की, तो वह सिलिकोट से उसे एक संदेश भेजने में कामयाब रहा। इसके बाद जो हुआ, वह किसी रोमांटिक फिल्म के सीन जैसा था। इरम ने याद करते हुए कहा कि जब मुझे सुबह उसका मैसेज मिला, तो मैं खिड़की से कूदकर सिलिकोट की तरफ भागी। मैंने उसे तब देखा जब गांव के पास वाले गेट पर पहुंची। उसने आर्मी के लोगों को सब कुछ बता दिया था और मैंने उसकी बात की पुष्टि की। मैं रो पड़ी।
अधिकारियों से सूचना मिलने के बाद इरम का परिवार भी वहां पहुंच गया। वह कहती हैं कि उसी दिन उनके परिवार को उनके रिश्ते के बारे में पता चला। सैनिकों ने दोनों को कुछ मिनटों के लिए साथ रहने दिया। जीशान के लिए यह सफर बिलकुल भी आसान नहीं था। उसने सिर्फ चप्पल पहने और अपने मोबाइल फोन एवं पहचान पत्र के साथ कठिन रास्तों को पार किया।
एक जगह तो उसका सामना एक तेंदुए से भी हुआ। इरम ने कहा कि बाद में उसने मुझे बताया कि रास्ते में उसे एक तेंदुआ दिखा था। उसके मुंह में किस्मत से पहले से ही कोई शिकार था और वह वहां से चला गया। वरना कुछ भी हो सकता था। जीशान अभी बारामूला जिला जेल में बंद है। कई एजेंसियों ने दोनों से पूछताछ की है और उनके डिजिटल कम्युनिकेशन की जांच की है। इरम के अनुसार जांचकर्ताओं को उनकी कहानी सच्ची लगी।



