E-20 ईंधन विवाद में मारुति सुजुकी एवं डीलर जिम्मेदार, नई कार देने या फिर 20.50 लाख रुपए लौटाने का आदेश

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E-20) से जुड़ी तकनीकी खराबी के मामले में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर नवेरा मेंटेनो स्काई ऑटो मोबाईल्स को सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

उपभोक्ता अदालत से इस आदेश की प्रति गुरुवार को मिली है। आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसी मॉडल की नई E-20 अनुकूल कार उपलब्ध कराने अथवा वाहन की कीमत, बीमा, आरटीओ सहित कुल 20,50,288 रुपए लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही एक लाख रुपए मानसिक प्रताड़ना, 10 हजार रुपए वाद व्यय तथा भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के भी आदेश दिए हैं। ये आदेश उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की बेंच ने दिया है। इस मामले का खुलासा उस वक़्त हुआ जब कार्रवाई संबंधित लैटर सोशल मीडिया में आने के बाद हलचल बढ़ी।

आयोग के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों के अनुसार रायपुर निवासी चिकित्सक डॉ. प्रमोद देवड़ा ने तीन जून 2024 को मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस 1.5 सीवीटी कार 18.29 लाख रुपए में खरीदी थी। बीमा एवं आरटीओ समेत वाहन पर कुल 20,50,288 रुपए खर्च हुए। वाहन वारंटी अवधि में था लेकिन करीब 21,913 किलोमीटर चलने के बाद 11 नवंबर 2024 को इंजन खराबी का संकेत मिलने के साथ वाहन बंद हो गया।

शिकायत के अनुसार वाहन को कई बार अधिकृत वर्कशॉप ले जाया गया। पहली बार पेट्रोल टैंक खाली कर साफ किया गया और नया पेट्रोल डालकर वाहन लौटाया गया, लेकिन कुछ दूरी चलने के बाद फिर इंजन बंद हो गया। दूसरी बार कंपनी ने स्वीकार किया कि टैंक पूरी तरह साफ नहीं हुआ था और केमिकलयुक्त ईंधन शेष रह गया था। तीसरी बार भी फ्यूल टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में सफेद परत तथा तरल पदार्थ मिला। चौथी बार इंजन में खराबी की चेतावनी आई और ईवी मोड ने काम करना बंद कर दिया, जबकि पांचवीं बार इंजन पूरी तरह ठप हो गया।

आयोग के आदेश में उल्लेख है कि पेट्रोल के नमूने की जांच स्वतंत्र सरकारी मान्यता प्राप्त एसजीएस प्रयोगशाला से कराई गई। रिपोर्ट में पेट्रोल में इथेनॉल की उपस्थिति की पुष्टि हुई तथा निचले हिस्से में सफेद परत के रूप में इथेनॉल अलग मिला। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईंधन E-20 श्रेणी का था लेकिन सफेद परत बनने के कारण प्रभावी इथेनॉल की मात्रा लगभग छह से सात प्रतिशत रह गई।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वाहन निर्माता यह जानते हुए भी कि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की मात्रा 20 प्रतिशत तक बढ़ाई जा चुकी है और देशभर में E-20 पेट्रोल उपलब्ध कराया जा रहा है, उपभोक्ता को ऐसा वाहन बेच दिया जिसका इंजन E-20 ईंधन के अनुरूप नहीं था। आदेश में यह भी कहा गया कि वाहन बेचते समय उपभोक्ता को यह नहीं बताया गया कि संबंधित मॉडल 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर संचालित होने के लिए उपयुक्त नहीं है।

आयोग ने माना कि केवल ईंधन की गुणवत्ता का तर्क पर्याप्त नहीं है, क्योंकि निर्माता यह स्पष्ट नहीं कर सका कि वाहन में आई खराबी केवल ईंधन के कारण थी या वाहन की तकनीकी संरचना के कारण। आयोग ने यह भी माना कि वाहन बार-बार खराब होने से उपभोक्ता को लगातार वर्कशॉप जाना पड़ा और अपने चिकित्सा पेशे से जुड़े कार्यों में भी व्यवधान आया, जिससे आर्थिक नुकसान एवं मानसिक प्रताड़ना हुई।

सुनवाई के दौरान कंपनी ने तर्क दिया कि वाहन में किसी प्रकार का निर्माण दोष नहीं था और समस्या मिलावटी अथवा गुणवत्ता प्रभावित पेट्रोल के कारण उत्पन्न हुई। कंपनी ने यह भी कहा कि वाहन को वारंटी के तहत आवश्यक मरम्मत की गई तथा कई बार पेट्रोल टैंक साफ कर वाहन उपभोक्ता को सौंपा गया। हालांकि आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, लैब रिपोर्ट और वाहन की बार-बार हुई खराबियों के आधार पर इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।

आयोग ने आदेश दिया कि यदि 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उसी मॉडल की E-20 अनुकूल नई कार उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो कंपनी वाहन की पूरी कीमत, आरटीओ पंजीकरण, बीमा सहित कुल 20,50,288 रुपए लौटाएगी। इसके अतिरिक्त आदेश की तिथि से भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज, एक लाख रुपए मानसिक प्रताड़ना तथा 10 हजार रुपए वाद व्यय का भुगतान भी करना होगा।

ऑटो विशेषज्ञ के महेश कुमार ने कहा कि इथेनॉल गन्ने से तैयार होता है। यदि उसमें नमी हो तो वह पेट्रोल में सामान रूप से नहीं घुल पाता, क्योंकि दोनों की डेंसिटी अलग होती है। इससे फ्यूल पंप और फ्यूल सिस्टम के बाकी हिस्सों पर असर पड़ सकता है। हालांकि हर मामले में केवल इथेनॉल को इंजन खराब होने की वजह मानना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि भारत में अभी भी कई वाहन पूरी तरह E-20 ईंधन के अनुरूप विकसित नहीं हुए हैं। जिस तरह से पेट्रोल में बदलाव हो रहा है, उस तरह से गाड़ियों को भी अपडेट करने की आवश्यकता है।