बहराइच में मासूम बालक के साथ कुकर्म और हत्या के दोषी को मृत्यु दंड

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बहराइच। उत्तर प्रदेश में बहराइच जिले की एक विशेष अदालत ने सात वर्षीय बालक के साथ दुष्कर्म कर उसकी निर्मम हत्या करने के मामले में दोषी अभियुक्त को घटना के लगभग दो माह के भीतर मृत्यु दण्ड की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर एक लाख रुपए का अर्थदण्ड भी लगाया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार जनपद के थाना कैसरगंज क्षेत्र के दयालपुरवा मंझारा तौकली निवासी लक्ष्मण निषाद ने 13 मई 2026 को तहरीर देकर बताया था कि उनका सात वर्षीय पुत्र धनंजय 12 मई की रात गांव में आयोजित एक शादी समारोह में गया था, लेकिन वापस घर नहीं लौटा। अगले दिन सुबह घर से करीब 400 मीटर दूर झाड़ियों में बालक का शव बरामद हुआ, जिसके गले पर गंभीर चोट के निशान थे। तहरीर के आधार पर थाना कैसरगंज में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देश पर क्षेत्राधिकारी कैसरगंज के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों और पूछताछ से यह तथ्य सामने आया कि बालक के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या की गई थी। पुलिस ने 13 मई को ही ग्राम घाघी रघौली मंझारा तौकली स्थित एक बाग से आरोपी मुकेश निषाद (20) निवासी दयालपुरवा मंझारा तौकली को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने पुरानी रंजिश के चलते बालक के साथ दुष्कर्म कर हत्या करने की बात स्वीकार की।

पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना पूरी करते हुए 11 जून 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5एम/6 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया। न्यायालय ने 22 जून को आरोप तय किए और त्वरित सुनवाई पूरी करते हुए 23 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया।

विशेष पॉक्सो न्यायालय के पीठासीन अधिकारी अरविन्द कुमार गौतम ने दोषी मुकेश निषाद को बीएनएस की धारा 103(1) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5एम/6 के तहत मृत्युदण्ड एवं एक लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई। अर्थदण्ड अदा न करने की स्थिति में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।

पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन पक्ष तथा विवेचना टीम के समन्वित प्रयासों से घटना के लगभग एक माह में आरोप पत्र दाखिल कर त्वरित सुनवाई सुनिश्चित कराई गई, जिसके परिणामस्वरूप दोषी को मृत्युदण्ड की सजा मिली।