निजी विश्वविद्यालय एक्ट में संशोधन से शिक्षा का व्यापारीकरण बढ़ेगा : अभाविप

3

सरकार से संशोधन वापस लेने की मांग, प्रदेशव्यापी छात्र आंदोलन की दी चेतावनी
जयपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने राजस्थान सरकार द्वारा निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी दिशा-निर्देशों में किए गए हालिया संशोधनों का कड़ा विरोध करते हुए इसे उच्च शिक्षा के व्यापारीकरण और बाजारीकरण को बढ़ावा देने वाला निर्णय बताया है। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों में शिथिलता से शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही प्रभावित होगी।

अभाविप का कहना है कि शिक्षा कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, चरित्र निर्माण और सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। ऐसे में शिक्षा के मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।

परिषद ने आरोप लगाया कि संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए एकीकृत परिसर की अनिवार्यता समाप्त कर दो अलग-अलग भूखंडों पर विश्वविद्यालय स्थापित करने की अनुमति दी गई है। इससे न्यूनतम संसाधनों के आधार पर विश्वविद्यालय खोलने का रास्ता आसान होगा, जिसका सीधा असर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

अभाविप ने कहा कि पिछले वर्षों में राज्य के कुछ निजी विश्वविद्यालयों में फर्जी डिग्रियां बांटने के मामले सामने आने से उच्च शिक्षा की छवि पहले ही प्रभावित हुई है। ऐसे में गुणवत्ता सुधार के बजाय मानकों में ढील देना उचित नहीं है। परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि यह संशोधन किसी विशेष व्यक्ति या संस्थान को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से लाया गया प्रतीत होता है।

परिषद ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों और सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पर्याप्त भूमि, समुचित शैक्षणिक अधोसंरचना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण आवश्यक है। अभाविप ने प्रो. यशपाल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2005) तथा आयुष जैन बनाम ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (2025) के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि होने चाहिए।

अभाविप के राष्ट्रीय मंत्री हर्षित ननोमा ने कहा कि विश्वविद्यालयों की स्थापना के मानकों को कमजोर करना और परिसरों को व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बनाना शिक्षा की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में सुधार का आधार गुणवत्ता, शोध, पारदर्शिता और विद्यार्थियों का हित होना चाहिए, न कि व्यावसायिक लाभ।

परिषद ने राज्य सरकार के उस निर्णय पर भी गंभीर आपत्ति जताई, जिसके तहत राजस्थान विश्वविद्यालय सहित राज्य के 47 विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की भूमि पर पेट्रोल और डीजल पंप स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अभाविप का कहना है कि विश्वविद्यालय ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के केंद्र होते हैं, न कि व्यावसायिक गतिविधियों के। परिसरों की भूमि का व्यावसायिक उपयोग भविष्य में शैक्षणिक विस्तार, अनुसंधान सुविधाओं और विद्यार्थियों के हितों को प्रभावित करेगा।

अभाविप के प्रदेश मंत्री जितेंद्र लोधा ने राज्य सरकार से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी संशोधनों को तत्काल वापस लेने तथा विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय परिसरों में पेट्रोल पंप या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति देने के निर्णय को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, शुल्क, अधोसंरचना, शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, नियुक्तियों और वित्तीय पारदर्शिता की निगरानी के लिए राजस्थान निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के गठन की भी मांग की।

परिषद ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार इन संशोधनों को वापस नहीं लेती और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता तथा गरिमा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाती, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेशभर में व्यापक छात्र आंदोलन शुरू करेगी।