शिवछत्रपति के शुद्धीकरण अभियान को 350 वर्ष पूर्ण
सोलापुर। राष्ट्रीय शुद्धीकरण दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र के सोलापुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अन्य धर्मों में गए पांच लोगों ने स्वेच्छा से विधिवत हिंदू धर्म में पुनर्प्रवेश किया। हिंदू जनजागृति समिति और हिंदू राष्ट्र सेना के संयुक्त तत्वावधान में अशोक चौक स्थित लोटस मल्टीपर्पज हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में धर्मांतरण की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए हिंदू समाज को संगठित होकर धर्मरक्षा के लिए कार्य करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन हिंदवी स्वराज्य के दूसरे सरसेनापति नेताजी पालकर के शुद्धीकरण (घरवापसी) के 350 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया गया। इस अवसर पर हिंदू जनजागृति समिति ने समाज से इस दिन को राष्ट्रीय शुद्धीकरण दिवस के रूप में मनाने की अपील भी की।
मुख्य वक्ता एवं हिंदू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ राज्य संगठक सुनील घनवट ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा सरसेनापति नेताजी पालकर का शुद्धीकरण कर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में प्रलोभन, धोखाधड़ी और लव जिहाद जैसे माध्यमों से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए समाज को जागरूक और संगठित होना आवश्यक है। उन्होंने लोगों से इतिहास पढ़ने के साथ-साथ इतिहास रचने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
घनवट ने धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अत्याचार सहने के बावजूद अपने धर्म का त्याग नहीं किया। उन्होंने धर्मांतरित लोगों के सम्मानपूर्वक स्वधर्म में पुनर्प्रवेश के लिए समाज के द्वार सदैव खुले रखने पर बल दिया।
हिंदू राष्ट्र सेना के रवि गोणे ने कहा कि धर्मांतरित लोगों की घरवापसी के लिए चलाए जा रहे जनजागरण अभियान को समाज का सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक लोग स्वेच्छा से अपने मूल धर्म में लौटना चाहते हैं, ऐसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें सम्मानपूर्वक वापस लाने के लिए संगठित प्रयास किए जाने चाहिए।
सामाजिक विश्लेषक एवं लेखापरीक्षक सर्वेश मेंहदले ने कहा कि बढ़ते धर्मांतरण के कारण कई क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने इसे सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टि से गंभीर विषय बताते हुए समाज से अधिक सतर्क और सक्रिय रहने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में श्रीक्षेत्र तुलजापुर के महंत मावजीनाथ महाराज ने हिंदू धर्म की आध्यात्मिक परंपरा और मोक्ष की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए धर्म के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। वहीं प्रज्ञापुरी ज्ञानपीठ के पीठासीन धर्माधिकारी प्रसाद पंडित ने भी उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने छत्रपति शिवाजी महाराज और धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज से प्रेरणा लेकर धर्मरक्षा, जनजागरण और संगठन के कार्य को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। साथ ही, धर्मांतरित लोगों की सम्मानपूर्वक घरवापसी के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का भी संकल्प व्यक्त किया।




