अजमेर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सभागार में ‘राष्ट्र के पुनरुत्थान में युवाओं की भूमिका’ विषय पर युवा चिकित्सकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने मुख्य वक्ता के रूप में युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसकी अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने की। इस अवसर पर विभाग संघचालक मुकेश अग्रवाल तथा महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, मेडिकल विद्यार्थी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अनिल सामरिया ने कहा कि भारत के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति है। यदि युवाओं को सही दिशा, संस्कार और उद्देश्यपूर्ण मार्गदर्शन मिले तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास केवल आर्थिक प्रगति या तकनीकी उन्नति से नहीं, बल्कि युवाओं के चरित्र, कर्तव्यबोध, राष्ट्रभक्ति, सेवा भाव और नवाचार से होता है। उन्होंने युवाओं से रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने और समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि विश्व के अनेक देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के बावजूद उनके नागरिक अपनी सांस्कृतिक पहचान, इतिहास और पूर्वजों के प्रति एकमत हैं। उन्होंने कहा कि भारत में अभी भी सांस्कृतिक पहचान को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता है। उनके अनुसार ‘भारत’ केवल एक नाम नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यता का प्रतीक है। उन्होंने म्यांमार का उदाहरण देते हुए बताया कि स्वतंत्रता के बाद उसने अपने मूल नाम को पुनः अपनाया।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में स्वराज, स्वदेशी, स्वाधीनता जैसे विचार भारत की आत्मा और अध्यात्म से प्रेरित थे। वंदे मातरम् का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 1905 के बंग-भंग आंदोलन के दौरान हिंदू और मुस्लिम समाज ने मिलकर इसका उद्घोष किया तथा रक्षाबंधन के माध्यम से एकता का संदेश दिया। अंग्रेजों द्वारा वंदे मातरम् पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद जनआंदोलन के दबाव में 1911 में बंगाल विभाजन का प्रस्ताव वापस लेना पड़ा और वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बन गया।
डॉ. वैद्य ने कहा कि आज समाज में अधिकारों की चर्चा अधिक होती है, जबकि नागरिक कर्तव्यों की उपेक्षा की जाती है। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष में चल रहे पंच परिवर्तन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज परिवर्तन की शुरुआत प्रत्येक नागरिक के छोटे-छोटे दायित्वों के पालन से होती है। यातायात नियमों का पालन, स्वच्छता, जल एवं बिजली की बचत तथा सार्वजनिक स्थलों पर अनुशासन जैसे कार्य भी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
कार्यक्रम के अंत में महानगर संघचालक खाजूलाल चौहान ने सभी चिकित्सकों, विद्यार्थियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजय पाल ने किया।




