अजमेर। 1992 के बहुचर्चित ब्लैकमेलिंग कांड के मास्टरमाइंड नफीस चिश्ती की अजमेर सेंट्रल जेल में बंद कैदियों से वीडियो कॉल पर बात करवाने के मामले में केंद्रीय कारागृह अजमेर के जेलर सद्दाम हुसैन पर गाज गिरी है। सरकार ने तुरंत प्रभाव से आदेश जारी कर बंदियों के साथ निषिद्ध सामग्री का उपयोग करने तथा कारागृह के बाहर के व्यक्तियों से संपर्क रखने के आरोपों के जेलर को निलंबित कर दिया है।
महानिदेशक (कारागार) अशोक राठौड़ ने राजस्थान सिविल सेवाएं नियम, 1958 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निलंबन आदेश जारी किया।आदेश के अनुसार इन आरोपों के संबंध में विभागीय जांच प्रस्तावित है। जांच को प्रतिकूल रूप से प्रभावित न करने के उद्देश्य से निलंबन अवधि के दौरान कारापाल सद्दाम हुसैन का मुख्यालय केंद्रीय कारागृह श्रीगंगानगर निर्धारित किया गया है।
इस प्रकरण में आगे की कार्रवाई के तहत केंद्रीय कारागृह अजमेर में निरुद्ध बंदी सैयद तौसीफ चिश्ती को केंद्रीय कारागृह भरतपुर स्थानांतरित किया गया है वहीं प्रकरण के संबंध में पुलिस थाना सिविल लाइन्स अजमेर में प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। जेलर सद्दाम हुसैन और वीडियो कॉल पर बात करने वाले सभी 5 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। बात करने वाले एक कैदी तौसीफ चिश्ती उर्फ चिंकी को सेंट्रल जेल से भरतपुर शिफ्ट कर दिया है।
गौरतलब है कि जेलर सद्दाम हुसैन ने अपने मोबाइल से नफीस चिश्ती को वीडियो कॉल किया और जेल में बंद तीन सजायाफ्ता कैदियों तारिक चिश्ती, उसके बेटे तौसीफ चिश्ती और भांजे फखर जमाली से बात करवाई। वायरल हुए वीडियो कॉल में दिख रहे जेलर सद्दाम हुसैन, नफीस चिश्ती, तारिक चिश्ती, तौसीफ चिश्ती और फखर जमाली के खिलाफ अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ है।



