संजय राउत ने महाराष्ट्र मंत्रिमंडल को ‘मूर्खों का मंत्रिमंडल’ करार दिया

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मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए राज्य मंत्रिमंडल को ‘मूर्खों का मंत्रिमंडल’ करार देते हुए सत्ताधारी दलों के बड़े नेताओं को टेलीप्रॉम्प्टर के बिना राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ सुनाने की चुनौती दी।

राउत ने मंत्री जयकुमार गोरे के बारे में टिप्पणी करने पर मिले नोटिस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर ‘मूर्ख’ शब्द असंसदीय है, तो सेंसर बोर्ड को इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर सरकार चलाने के लिए सोच-समझकर ‘मूर्खों’ को इकट्ठा किया है। उन्होंने अधिकारियों को चुनौती दी कि वे इसे ‘मूर्ख मंत्रिमंडल’ कहने के लिए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करें।

सोनिया गांधी के रुख को ‘बौद्धिक नक्सलवाद’ बताने वाले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान का जवाब देते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को कांग्रेस पार्टी ने अपनाया था, भारतीय जनता पार्टी ने नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फडणवीस को टेलीप्रॉम्प्टर की मदद के बिना कम से कम दो पद सुनाने की चुनौती दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण का भी मज़ाक उड़ाया और दावा किया कि लाल किले पर टेलीप्रॉम्प्टर खराब होने के कारण उन्हें पढ़ने में मुश्किल हुई। साथ ही उन्होंने मंत्री गिरीश महाजन का भी मज़ाक उड़ाया।

राउत ने ‘अंधभक्त’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भेजे गए नोटिस पर कड़ी नाराज़गी जताई और सरकार के इस कदम को सरासर बेवकूफी बताया। उन्होंने गांधी के बयान का बचाव करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या संसद से वॉकआउट करने वाले नेता परमवीर चक्र जैसे वीरता पुरस्कार पाने के हकदार हैं।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा के दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे को अपनी ही पार्टी के भीतर बहुत ज़्यादा परेशान किया गया था। उन्होंने एक सनसनीखेज दावा किया कि अगर मुंडे ने उस समय कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया होता, तो शायद उनकी जान बच सकती थी। उन्होंने बाबा रामदेव पर भी तंज कसते हुए कहा कि योग गुरु अब बहुत ज़्यादा सतर्क हो गए हैं।