अजमेर में नगरीय निकाय वार्डों की लॉटरी ने बदले नेताओं के राजनीतिक समीकरण

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अजमेर। जिले के नगरीय निकायों के वार्डों के लिए आरक्षण निर्धारण की लॉटरी सोमवार को जिला निर्वाचन अधिकारी लोक बन्धु की अध्यक्षता में जवाहर रंगमंच में निकाली गई।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अभिषेक गोयल ने बताया कि इसमें नगर निगम अजमेर, नगर परिषद पुष्कर एवं किशनगढ़ तथा नगरपालिका नसीराबाद, पीसांगन, सरवाड़, टांटोटी, सावर एवं केकड़ी के सदस्यों के आगामी आम चुनाव के आरक्षण के लिए लॉटरी के माध्यम से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (सामान्य एवं महिला), अन्य पिछड़ा वर्ग (सामान्य एवं महिला) तथा सामान्य वर्ग महिला के लिए वार्डों का निर्धारण किया गया।

राज्य सरकार से प्राप्त निर्देशों के अनुसार विभिन्न वार्डों की जनसंख्या तथा वर्ग के आधार पर लॉटरी निकाली गई। विद्यार्थी कवेश तथा तन्मया ने वार्डों की पर्चियां बॉक्स से निकाली। आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हुई। सपूर्ण प्रक्रिया को एलईडी के माध्यम से दिखाया गया।

इस अवसर पर निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी प्रवीण कुमार, कोषाधिकारी भागीरथ सिंह, संस्थापन अधिकारी सतीश सैनी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

आरक्षण ने मुश्किल की चुनावी राह

अजमेर नगर निगम के सभी 80 वार्डो के आरक्षण की लॉटरी सामने आने के साथ ही लंबे समय से पार्षद बनने की तैयारी कर रहे नेताओं के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। कई नेताओं को अपने मनपसंद वार्ड से चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा, जबकि कई दावेदारों के लिए आरक्षण ने चुनावी राह मुश्किल कर दी है। वहीं नगर निगम के अध्यक्ष पद का आरक्षण महिला सामान्य वर्ग के लिए तय होने से इस बार निगम की राजनीति में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।

आरक्षण की लॉटरी के बाद अब उन नेताओं और संभावित प्रत्याशियों की नजरें दूसरे वार्डों पर टिक गई हैं, जो लंबे समय से किसी खास वार्ड से पार्षद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। जिस वार्ड का आरक्षण उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं आया, वहां अब उन्हें या तो अपनी रणनीति बदलनी होगी या फिर दूसरे वार्ड से राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी। खास तौर पर सामान्य, एससी, ओबीसी और एसटी आरक्षण के साथ महिला आरक्षण ने कई संभावित उम्मीदवारों के चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।

नगर निगम अध्यक्ष पद महिला सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद अब राजनीतिक दलों में महिला दावेदारों को लेकर भी चर्चाएं तेज होंगी। पार्षद चुनाव के बाद निगम के शीर्ष पद पर कौन पहुंचेगा, इसे लेकर भी अभी से राजनीतिक गणित शुरू हो गया है। आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद अब अजमेर नगर निगम चुनाव में टिकट वितरण और संभावित प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है।