कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पानीहाटी नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ डे को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की दुष्कर्म-हत्या पीड़िता के शव के अगस्त 2024 में कथित तौर पर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार किए जाने के मामले में गुरुवार को बेंगलूरु से गिरफ्तार किया गया।
तृणमूल कांग्रेस नेता डे शवदाह से जुड़े परिस्थितियों की जांच शुरू होने के बाद से फरार थे। बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्हें गुरुवार तड़के बेंगलुरु से पकड़ा गया। डे को बेंगलूरु की सिटी सिविल अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें फिलहाल पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
जांचकर्ता उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल लाने और बैरकपुर की अदालत में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। अभियोजन पक्ष द्वारा विस्तृत पूछताछ के लिए उनकी पुलिस हिरासत मांगे जाने की संभावना है। डे इस मामले में गिरफ्तार किए गये तीसरे आरोपी हैं। उनकी गिरफ्तारी से 31 वर्षीय स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक की मौत से जुड़े विवाद में नया राजनीतिक आयाम जुड़ गया है।
पानीहाटी के पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक निर्मल घोष और पीड़िता के परिवार के पड़ोसी संजीव मुखर्जी को इससे पहले गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, दोनों को बाद में जमानत मिल गई। घोष, मुखर्जी और डे को खड़दह पुलिस द्वारा पीड़िता के पिता की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद मामले में मुख्य आरोपियों के रूप में नामजद किया गया था।
परिवार ने आरोप लगाया है कि उनकी सहमति के बिना शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार किया गया। परिवार ने यह आशंका भी जताई है कि शवदाह की प्रक्रिया इस तरह कराए जाने का उद्देश्य दूसरी बार शव का पोस्टमार्टम कराने से रोकना तथा साक्ष्यों को नष्ट करने या छिपाने की गुंजाइश पैदा करना था।
जांचकर्ताओं के अनुसार शव को खड़दह थाने के अंतर्गत पानीहाटी स्थित एक श्मशान घाट ले जाया गया था और कथित तौर पर कतार में पहले से इंतजार कर रहे दो शवों को पीछे छोड़कर पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार कराया गया। शवदाह से संबंधित दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठे हैं। पीड़िता के परिवार का दावा है कि इन दस्तावेजों पर किए गए हस्ताक्षर उसके माता-पिता या अन्य करीबी रिश्तेदारों के नहीं थे।
यह मामला आरजी कर अस्पताल में दुष्कर्म और हत्या की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच से अलग है। सीबीआई की जांच सरकारी अस्पताल के भीतर चिकित्सक की मौत से संबंधित है, जबकि खड़दह का मामला विशेष रूप से उसके बाद शव के अंतिम संस्कार से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रहा है।
शवदाह को लेकर विवाद ने उस समय फिर राजनीतिक तूल पकड़ा, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चिकित्सक की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में शव के निस्तारण से जुड़ी परिस्थितियों की अलग से जांच की मांग की।
अधिकारी ने शवदाह शुल्क कथित तौर पर माफ किए जाने और संबंधित दस्तावेजों पर पीड़िता के परिवार के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने बैरकपुर के पुलिस आयुक्त को आवश्यक कदम उठाने और अलग मामला दर्ज करने का निर्देश भी दिया था।
डे की गिरफ्तारी के साथ ही पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय नेता जांच के केंद्र में आ गए हैं। चिकित्सक का शव 9 अगस्त 2024 की सुबह आरजी कर अस्पताल के एक सभागार में मिला था। बाद में जांचकर्ताओं ने स्थापित किया कि पिछली रात उसके साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी हत्या कर दी गई थी।



