घोष की गूंज के साथ निकला पथ संचलन, कदम से कदम मिलाकर चले स्वयंसेवक

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जन्माष्टमी पर ‘नाद गोविंदम् 3.0’ का आयोजन, 101 घोषवादकों ने प्रस्तुत कीं 24 रचनाएं
जयपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऋषि गालव भाग की ओर से शुक्रवार को प्रांत घोष दिवस के अवसर पर नाद गोविंदम् 3.0 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत तोपखाना संघस्थान से घोष पथ संचलन निकाला गया। घोष वाद्य यंत्रों की ओजपूर्ण स्वरलहरियों के बीच सैकड़ों स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर चले।

पथ संचलन पांचबत्ती, अजमेरी द्वार होते हुए रामनिवास बाग स्थित केंद्रीय संग्रहालय पहुंचा। यहां स्थिर वादन कार्यक्रम हुआ, जिसमें 101 घोषवादकों ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर 24 रचनाओं का वादन किया।

घोष अनुशासन और राष्ट्रभाव जगाता है

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक ने कहा कि संगीत केवल चर जगत ही नहीं, अचर जगत की संवेदनाओं को भी प्रभावित करता है। भारतीय संगीत परंपरा में प्रसन्नता, उत्साह और साधना के अवसरों पर संगीत का विशेष महत्व रहा है। संघ के घोष विभाग ने उत्कृष्ट स्वदेशी रचनाओं का निर्माण किया है, जिनका उपयोग भारतीय सेना भी गर्व के साथ करती है।

उन्होंने कहा कि घोष की ओजपूर्ण स्वरलहरियां स्वयंसेवकों में अनुशासन, एकाग्रता और राष्ट्रभक्ति का संचार करती हैं। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी और शंख दोनों ही प्रेरणा के प्रतीक हैं।


गीता देती है कर्तव्य और धर्म की प्रेरणा

अनिल ओक ने कहा कि गीता का मूल संदेश धर्म की स्थापना और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है। राष्ट्र और समाज की रक्षा के लिए साहस, संकल्प और कर्तव्यबोध आवश्यक है। उन्होंने वीर सावरकर के जीवन को राष्ट्र के प्रति सर्वस्व समर्पण और त्याग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्ति निर्माण, अनुशासन और समाज सेवा का प्रशिक्षण देती हैं।

संगीत अनुशासन का प्रभावी माध्यम : आलोक भट्ट

मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गायक, संगीत रचनाकार एवं मोहन वीणा वादक पंडित आलोक भट्ट ने कहा कि संगीत व्यक्ति में अनुशासन, एकाग्रता और संवेदनशीलता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ अधिकारी, स्वयंसेवक, मातृशक्ति तथा शहर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।