ब्रिक्स में मोदी का बड़ा संदेश: UNSC सुधार पर जल्द फैसला, नाविकों की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी नेटवर्क का प्रस्ताव

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक संस्थाओं में व्यापक सुधार की जरूरत को प्रमुखता से उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया की निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि समान और प्रभावी होनी चाहिए।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक संस्थाओं की संरचना भी मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में अधिक मजबूत स्थान देने पर जोर दिया।

भविष्य साझा है तो निर्माण का अधिकार भी साझा हो

मोदी ने ब्रिक्स को किसी देश या समूह के खिलाफ मंच नहीं बताते हुए कहा कि संगठन को अपनी एकजुटता और सहमति को ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत ने ब्रिक्स की आगामी कार्ययोजना को अधिक व्यावहारिक, जवाबदेह और लोगों की जरूरतों से जुड़ा बनाने पर भी जोर दिया है।

भारत की ओर से वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने और विकासशील देशों की निर्णय प्रक्रिया में बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की पहल भी सामने रखी गई है।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार तभी सुचारु रूप से आगे बढ़ सकता है, जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, आपूर्ति श्रृंखलाएं खुली रहें और समुद्र में काम करने वाले नाविक सुरक्षित हों।

इसी क्रम में भारत ने ‘सीफेयरर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क’ बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में नाविकों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित व्यवस्था में आपात सूचना, चिकित्सा सहायता, परिवारों से संपर्क और जरूरत पड़ने पर निकासी जैसे उपायों को बेहतर ढंग से समन्वित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा अहम

समुद्री सुरक्षा का मुद्दा ऐसे समय उठा है, जब पश्चिम एशिया और अन्य संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़े हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा भी चुनौती बनी हुई है।

ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात में भी नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पर चर्चा की थी। भारत ने क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किए जाने की अपनी नीति दोहराई।

ब्रिक्स का साझा संदेश: बहुपक्षीय व्यवस्था मजबूत हो

ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन सदस्य देशों ने वैश्विक तनावों, व्यापार संबंधी चुनौतियों और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। सम्मेलन के दौरान अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में मध्य पूर्व की स्थिति पर चिंता जताते हुए तनाव कम करने और विवादों का समाधान संवाद एवं कूटनीति से करने पर जोर दिया गया।