नंदीग्राम उपचुनाव में ममता को बागी TMC का ऑफर, बोला- आप लड़िए, हम उम्मीदवार नहीं उतारेंगे

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विवाद अब नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव तक पहुंच गया है। पार्टी के बागी धड़े ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। बागी गुट का कहना है कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ती हैं तो वह उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

बागी TMC के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा कि उनका गुट चाहता है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ें, जीतें और विधानसभा में वापस आएं। बागी खेमे के इस बयान को एक तरफ ममता को चुनाव लड़ने का न्योता माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे राजनीतिक चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है।

6 अक्टूबर को होना है उपचुनाव

नंदीग्राम सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा और मतगणना 9 अक्टूबर को प्रस्तावित है। यह सीट भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के एक से अधिक विधानसभा सीटों से जीतने के बाद खाली हुई है। अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिसके बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

नंदीग्राम ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम सीट रही है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन मामूली अंतर से हार गई थीं। इसके बाद नंदीग्राम बंगाल की राजनीति में ममता और शुभेंदु के बीच टकराव का बड़ा प्रतीक बन गया।

भाजपा विरोधी वोटों को लेकर बागी गुट का तर्क

बागी TMC विधायक मदन मित्रा ने इस प्रस्ताव के पीछे राजनीतिक गणित भी बताया है। उनका कहना है कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं और बागी गुट उम्मीदवार नहीं उतारता है, तो भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे की संभावना कम होगी।

बागी खेमे ने अपने इस फैसले को भाजपा की ‘बी-टीम’ होने के आरोपों का जवाब भी बताया है। उसका तर्क है कि यदि उसका उद्देश्य विपक्षी वोटों को बांटना होता तो वह ममता के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करता।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर भी घमासान

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा संगठनात्मक विवाद है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखा है और आयोग इस विवाद पर सुनवाई कर रहा है।

बागी गुट ने संकेत दिया है कि यदि नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव आयोग उसके पक्ष में फैसला नहीं करता है, तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर सकता है। ऐसे में नंदीग्राम उपचुनाव केवल दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह TMC के भीतर वर्चस्व की लड़ाई की भी परीक्षा बनता दिखाई दे रहा है।

क्या ममता स्वीकार करेंगी चुनौती?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी बागी गुट के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगी। फिलहाल TMC की ओर से इस सीट पर ममता की उम्मीदवारी को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है। वहीं, नंदीग्राम में भाजपा भी अपने उम्मीदवार की तैयारी में जुटी है।