जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने शहर की सियासत की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। 150 वार्डों वाले जयपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 95 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 43 सीटों पर संतोष करना पड़ा। शेष वार्डों में निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। ऐसे में जयपुर नगर निगम में अगले बोर्ड पर भाजपा का कब्जा लगभग तय हो गया है और अब निगाहें महापौर पद के लिए पार्टी के चयन पर टिकी हैं।
भाजपा को स्पष्ट बहुमत
जयपुर नगर निगम में बहुमत के लिए 76 पार्षदों की जरूरत होती है। भाजपा ने 95 वार्ड जीतकर इस आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया। परिणामों से साफ है कि शहर के अधिकांश हिस्सों में भाजपा प्रत्याशियों को मतदाताओं का समर्थन मिला। कांग्रेस 43 सीटों के साथ भाजपा से काफी पीछे रही। इस परिणाम के बाद नगर निगम में बोर्ड गठन को लेकर भाजपा की स्थिति मजबूत हो गई है।
कौन कहां से जीता?
मतगणना के दौरान सामने आए प्रमुख परिणामों में कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।
- वार्ड 41: भाजपा के दया सिंह धाकड़ विजयी।
- वार्ड 51: कांग्रेस के मनमोहन गुर्जर विजयी।
- वार्ड 71: कांग्रेस की 21 वर्षीय फैज हसन ने जीत दर्ज कर जयपुर निगम में युवा चेहरों की नई एंट्री दर्ज कराई।
- वार्ड 121: भाजपा के नीरज अग्रवाल विजयी।
- वार्ड 142: भाजपा की भगवती ने जीत दर्ज की।
शुरुआती चरण में घोषित 82 वार्डों के परिणामों में भाजपा ने 41, कांग्रेस ने 31 और निर्दलीयों ने 6 सीटें जीती थीं। इसके बाद जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, भाजपा ने अपनी बढ़त को और मजबूत किया।
150 वार्डों में मुकाबला
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में इस बार कुल 723 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा और कांग्रेस ने लगभग सभी वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारे थे, जबकि बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी चुनाव लड़ा। चुनाव से पहले 16 वार्ड ऐसे थे जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था।
भाजपा-कांग्रेस के बीच कितना अंतर?
| पार्टी | जीते वार्ड |
|---|---|
| भाजपा | 95 |
| कांग्रेस | 43 |
| निर्दलीय/अन्य | 12 |
| कुल | 150 |
इन आंकड़ों के मुताबिक भाजपा ने कांग्रेस से 52 वार्ड ज्यादा जीते। यानी कुल 150 में भाजपा की हिस्सेदारी करीब 63 प्रतिशत रही, जबकि कांग्रेस लगभग 29 प्रतिशत वार्डों तक सीमित रही।
जयपुर में किसका दबदबा?
जयपुर नगर निगम में भाजपा ने स्पष्ट राजनीतिक बढ़त कायम की है। 95 सीटों के साथ पार्टी को बहुमत के लिए जरूरी 76 के आंकड़े से 19 सीटें ज्यादा मिली हैं। इस परिणाम का असर अब सिर्फ नगर निगम बोर्ड तक सीमित नहीं रहेगा। जयपुर की स्थानीय राजनीति में भाजपा का संगठनात्मक प्रभाव मजबूत होने के साथ ही आने वाले समय में महापौर पद के लिए दावेदारी भी महत्वपूर्ण होगी।
महापौर की कुर्सी पर अब नजर
पार्षदों के परिणाम सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल महापौर को लेकर है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण महापौर चुनाव में उसका पलड़ा भारी माना जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर महापौर पद के दावेदारों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने अब निगम में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाने और अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती होगी।
मतदान में भी दिखा था उत्साह
जयपुर में इस बार मतदान प्रतिशत 63.55 प्रतिशत रहा। चुनाव में बड़ी संख्या में नए मतदाताओं और युवा मतदाताओं की भागीदारी भी चर्चा में रही। मतदान के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने पक्ष में परिणाम आने का दावा कर रहे थे।



