जमीन की आपत्ति और स्टे हटाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
बारां। जिले के अंता उपखंड अधिकारी हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया है। शिकायत जमीन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई के बदले कथित रिश्वत मांगने से संबंधित है। एसीबी के गोपनीय सत्यापन में एक मामले में रिश्वत की मांग की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
दो जमीनों को लेकर शिकायत, कुल 5.50 लाख मांगने का आरोप
एसीबी के अनुसार परिवादी ने कोटा एसीबी इकाई में शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसकी प्लानिंग की एक जमीन पर पूर्व एसडीएम की ओर से लगाई गई आपत्ति को हटाने के बदले वर्तमान एसडीएम द्वारा 5 लाख रुपये की मांग की जा रही थी।
इसके अलावा एक अन्य प्लानिंग वाली जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्थगन आदेश को हटाने के लिए 50 हजार रुपये मांगे जाने का आरोप लगाया गया। इस तरह परिवादी ने दोनों मामलों में कुल 5.50 लाख रुपए की रिश्वत मांगने की शिकायत की थी।
गोपनीय सत्यापन में 50 हजार की मांग सामने आई
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की कोटा इकाई ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। यह कार्रवाई एसीबी कोटा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय स्वर्णकार के निर्देशन में कराई गई।
एसीबी के मुताबिक सत्यापन के दौरान दूसरी जमीन के एग्रीमेंट पर लगे स्टे को हटाने के बदले 50 हजार रुपए की मांग किए जाने की पुष्टि हुई। परिवादी ने रकम कम करने का अनुरोध किया तो कथित तौर पर यह राशि 45 हजार रुपए पर तय हुई। रिपोर्टों के अनुसार अधिकारी ने यह रकम एक कथित बिचौलिए को देने के लिए कहा था।
ट्रैप की तैयारी, लेकिन नहीं हो पाया रिश्वत का लेन-देन
मांग का सत्यापन होने के बाद एसीबी ने एसडीएम को रिश्वत लेते हुए पकड़ने के लिए ट्रैप की कार्रवाई की तैयारी की। हालांकि, कार्रवाई से पहले ही इसकी भनक अधिकारी को लग गई।
इसके चलते रिश्वत की रकम का वास्तविक लेन-देन नहीं हो सका और एसीबी टीम अधिकारी को रकम लेते हुए गिरफ्तार नहीं कर सकी। इसके बावजूद सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के आधार पर एसीबी ने आगे की कानूनी कार्रवाई की।
5.50 लाख और 45 हजार-दोनों आंकड़ों का क्या मतलब?
मामले में सामने आए अलग-अलग आंकड़ों को लेकर भ्रम की स्थिति न हो, इसलिए दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
5.50 लाख रुपए वह कुल रकम है, जिसकी मांग का आरोप परिवादी ने अपनी शिकायत में लगाया था-5 लाख रुपए एक जमीन की आपत्ति हटाने और 50 हजार रुपए दूसरी जमीन के स्टे को हटाने के लिए।
वहीं एसीबी के गोपनीय सत्यापन में जिस मांग की पुष्टि हुई, वह दूसरी जमीन के स्टे से संबंधित 50 हजार रुपए की मांग थी, जिसे बातचीत के बाद 45 हजार रुपए पर तय किए जाने की बात सामने आई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 में दर्ज हुआ मामला
एसीबी ने हवाई सिंह यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। मामला रिश्वत की कथित मांग के सत्यापन के आधार पर दर्ज किया गया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मामले में ट्रैप के दौरान रिश्वत की रकम की बरामदगी नहीं हुई है। यानी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए मौके पर पकड़े जाने की कार्रवाई नहीं हुई। अब मामले में एसीबी की आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी।
अब एसीबी की जांच में क्या होगा?
मामला दर्ज होने के बाद एसीबी शिकायत, गोपनीय सत्यापन, कथित बातचीत, जमीन से जुड़े प्रशासनिक मामलों और कथित बिचौलिए की भूमिका सहित अन्य पहलुओं की जांच करेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी आरोप और एसीबी के सत्यापन पर आधारित है। हवाई सिंह यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।



