काम शुरू हो या ना हो नाम चमकने में कमी नहीं रहे

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आबूरोड नगरपालिका के बाहर खड़ी नवनियुक्त पालिकाध्यक्ष का निजी वाहन।

सबगुरु न्यूज़ – आबूरोड। निजी गाड़ियों पर नेताओं के द्वारा अपने पद का नाम की प्लेट लगाने के मामले में 2020 में झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई चल रही थी।

इस दौरान मुख्य न्यायाधीश डॉ. रवि रंजन ने मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध पुस्तक की पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि जो लोग अपने काम के प्रति समर्पित होते हैं, उन्हें समाज में अपनी पहचान के लिए नेमप्लेट की आवश्यकता नहीं होती। उनका काम ही उनके लिए बोलता है और उन्हें अपने वाहनों पर नेमप्लेट लगाने की जरूरत नहीं है।

लेकिन, आबूरोड नगर पालिका के बाहर खड़े एक निजी वाहन पर वाहन सवार का कुछ अलग ही टशन दिखा। नगर पालिका की पहली ही बैठक में उनके व्यवहार को लेकर हंगामा हो गया। लेकिन, बाहर निकल कर उनकी गाड़ी देखी तो उसे पर लाल रंग की प्लेट पर लिखा हुआ मिला अध्यक्ष नगर पालिका आबूरोड। इसके बाद सवाल ये उठने का कि इस तरह की नेम प्लेट कितनी वैधानिक हैं।

– क्या कहता है मोटर व्हीकल एक्ट

केंद्रीय मोटर वाहन नियम की धारा 50 और 51 ये कहती है कि कोई भी संवैधानिक पद पर बैठा अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने निजी वाहन पर अपने पद को में प्लेट नहीं लगा सकता है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत इसके लिए जुर्माने का प्रावधान है।

– सरकारी विभाग के वाहनों पर ही अनुमति

केन्द्रीय मोटर वाहन नियम की धारा 50 के तहत सरकारी और संवैधानिक पदों पर बैठे नेता और अधिकारी जिस विभाग से जुड़े हुए हैं उस विभाग से जुड़े हुए वाहन पर ही पदनाम की प्लेट लगा सकते हैं। इसके अलावा किसी भी निजी वाहन पदनाम की प्लेट अवैधानिक है।

नगर पालिका के बाहर गुरुवार को अध्यक्ष की नेमप्लेट लगे वाहन पर गुजरात पासिंग का नम्बर थे। ऐसे में ये तय है कि ये वाहन आबूरोड नगर पालिका से संबद्ध तो नहीं होगा। जिले में एकाध नेता ऐसे भी हैं जिनका ये रिकॉर्ड है कि जिले भर में उनका काम बोलता है तो उनके जनप्रतिनिधि के रूप में पूरे कार्यकाल में उनके निजी वाहन पर नेमप्लेट की जरूरत ही नहीं रही।