आबूरोड में यूआईटी से पास कॉलोनी में राजस्व रेकॉर्ड के गैर मुमकिन नाला और सेटेलाइट इमेज में मौके पर बदली गई नाले की स्थिति। राजस्व रिकॉर्ड और
सबगुरु न्यूज-आबूरोड। सिरोही नगर परिषद के समा जैसे ही ये आया कि नाले के बफर को कॉलोनाइजर ने कॉलोनी की फेसिलिटी में शामिल के लिया है। उसने इसकी जांच शुरू करवानी शुरू कर दी। यही नहीं ऐसी कॉलोनी में भूखंड खरीदने से निवेशक दूरगामी नुकसान नहीं हो ये बचा के लिए पट्टे की रजिस्ट्री नहीं करने के भी आदेश जारी कर दिए। लेकिन, आबूरोड में यूआईटी का कुछ अलग नज़ारा है। आबूरोड यूआईटी से जब इस तरह की कॉलोनी के नक्शा सूचना के अधिकार के तहत माँगा तो यूटीआईटी ये सूचना तैयार नहीं होने का हवाला देते हुए उस नक़्शे को नहीं दिया। जबकि कॉलोनी पास होने के बाद पट्टा तभी जारी किया जाता है जब कॉलोनी का नक्शा पास किया हुआ होता है।
– रेवेन्यू नक्शे और सेटेलाइट इमेज में अंतर साफ
आबूरोड की यूआईटी के द्वारा पास किए जाने का दावा किए जाने वाली एक कॉलोनी में की कुछ अलग ही स्थिति है। इसके रेवेन्यू नक्शे में और सेटेलाइट व्यू में जमीन आसमान का अंतर है। रेवेन्यू मैप कॉलोनी में बरसाती अंग्रेजी के एस आकार का है। लेकिन, सेटेलाइट व्यू में ये ही बरसाती नाला एल शेप में नजर आ रहा है। दोनों नक्शों का अंतर बता रहा है कि मौके पर बरसाती नाले से छेड़-छाड़ करके उसके काफी हिस्से को फेसिलिटी क्षेत्र का हिस्सा बता दिया गया है।
– जब अब कुछ सही को बरसाती नाले का डायवर्जन क्यों?
आबूरोड की जिस कोलोनी का नक्शा आरटीआई में तैयार नहीं होने का जवाब यूआईटी ने दिया था उस कॉलोनी नक्शा सिरोही की अनादरा कॉलोनी के नक़्शे की तरह छिपाना और मौके पर बरसाती नाले को डायवर्ट करना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि यहां भी सिरोही की तरह फेसिलिटी लैंड में कुछ न कुछ गड़बड़ झाला किया हुआ है। (https://www.sabguru.com/buffer-zone-land-included-in-facility-land-in-many-colonies-of-sirohi) सेटेलाइट व्यू में साफ नजर आ रहा है कि बरसाती नाले और उसके बफर में सड़के और पार्क बना दिए गए हैं। सवाल ये उठता है कि जब यूआईटी ने नाले के बफर और नाले को बचाते हुए कॉलोनी का नक्शा पास किया है फिर उसे ये लिखने की जरुरत क्या थी कि सूचना तैयार नहीं है और इसे तैयार करने में संसाधन लगेगा।