पंचायतीराज चुनाव की घोषणा के साथ अजमेर में निषेधाज्ञा लागू, रैली-जुलूस पर रोक

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अजमेर। पंचायतीराज आम चुनाव-2026 की घोषणा के साथ अजमेर जिले में कानून-व्यवस्था और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। जिला मजिस्ट्रेट लोक बंधु ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत यह आदेश जारी किया है। आदेश के तहत बिना अनुमति सभा, जुलूस, रैली और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने पर प्रतिबंध रहेगा।

प्रशासन ने चुनाव के दौरान मतदाताओं को भयमुक्त माहौल उपलब्ध कराने और लोक शांति बनाए रखने के लिए कई प्रतिबंध लागू किए हैं। आदेश अजमेर जिले की राजस्व सीमाओं में प्रभावी रहेगा।

बिना अनुमति सभा-जुलूस नहीं

निषेधाज्ञा के दौरान संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना किसी सार्वजनिक स्थल पर सभा, जुलूस, भाषण या अन्य आयोजन नहीं किया जा सकेगा। ध्वनि प्रसारण यंत्र के इस्तेमाल के लिए भी अनुमति लेना जरूरी होगा। अनुमति मिलने पर लाउडस्पीकर का उपयोग सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक ही किया जा सकेगा।

विवाह समारोह और शव यात्रा को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। आयोजनों के दौरान यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक शांति प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर भी रोक रहेगी।

हथियारों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध

आदेश के तहत सार्वजनिक स्थानों पर आग्नेयास्त्र, विस्फोटक और अन्य घातक हथियार लेकर चलने या उनका प्रदर्शन करने पर रोक रहेगी। हालांकि चुनाव ड्यूटी में तैनात सुरक्षा बलों, पुलिस, होमगार्ड तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को इससे छूट दी गई है।

सिख समुदाय के लोगों को धार्मिक परंपरा के अनुसार कृपाण रखने की अनुमति रहेगी। वृद्ध, दिव्यांग और बीमार व्यक्ति चलने के सहारे के लिए लाठी या बैसाखी का इस्तेमाल कर सकेंगे। लाइसेंसी हथियार को पुलिस थाने में जमा कराने के लिए ले जाने तथा निर्धारित नियमों के तहत राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन के प्रतियोगियों को भी संबंधित छूट दी गई है।

मतदाताओं को डराने-धमकाने पर सख्ती

चुनाव के दौरान किसी मतदाता को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से डराने, धमकाने अथवा दबाव बनाने की अनुमति नहीं होगी। जातीय या साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने वाली भाषा, भाषण और नारेबाजी पर भी रोक रहेगी।

ऐसी आपत्तिजनक सामग्री वाले पोस्टर, पर्चे, पैम्पलेट या अन्य चुनावी सामग्री के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण पर भी प्रतिबंध रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए भी साम्प्रदायिक या जातीय तनाव फैलाने वाली सामग्री का प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकेगा।

सोशल मीडिया पर भी निगरानी

प्रशासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू किए हैं। फेसबुक, एक्स (ट्विटर), व्हाट्सऐप, यूट्यूब और इंस्टाग्राम सहित इंटरनेट माध्यमों पर धार्मिक उन्माद, जातिगत द्वेष या दुष्प्रचार फैलाने वाली सामग्री प्रसारित करने पर रोक रहेगी। धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के मंच के रूप में भी नहीं किया जा सकेगा।

सरकारी भवनों और निजी संपत्तियों पर प्रचार सामग्री लगाने के नियम

सरकारी, अर्द्धसरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक भवनों पर पोस्टर, बैनर, कटआउट, नारे या चुनाव प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति नहीं होगी।

निजी संपत्ति पर चुनाव प्रचार सामग्री लगाने के लिए मालिक या धारक की पूर्व लिखित सहमति आवश्यक होगी। शहरी क्षेत्रों में निजी संपत्तियों पर लिखित सहमति के बावजूद नारे लिखने और पैम्पलेट चिपकाने पर रोक रहेगी।

मतदान और मतगणना केंद्रों के आसपास भी प्रतिबंध

मतदान दिवस पर मतदान केंद्र और मतगणना दिवस पर मतगणना केंद्र की 200 मीटर की परिधि में मोबाइल फोन, सेल फोन या वायरलेस उपकरण ले जाने अथवा इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध रहेगा। चुनाव ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इससे छूट दी गई है।

मतदाताओं को वाहनों के जरिए मतदान केंद्र तक ले जाने और मतदान के बाद वापस लाने पर भी रोक रहेगी।

नामांकन के समय भी सीमित रहेगी भीड़

नामांकन पत्र दाखिल करते समय रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय में उम्मीदवार सहित अधिकतम पांच लोगों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। नामांकन के दौरान उम्मीदवारों को रैली निकालने की अनुमति नहीं होगी।

आरओ और एआरओ कार्यालय के 100 मीटर के दायरे में जिला परिषद सदस्य के उम्मीदवार के लिए अधिकतम तीन, पंचायत समिति सदस्य के लिए दो और सरपंच पद के उम्मीदवार के लिए अधिकतम एक वाहन की अनुमति होगी।

विजय जुलूस पर भी रोक

पंचायतीराज चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्वाचित जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों, प्रमुख-उपप्रमुख, प्रधान-उपप्रधान तथा पंच-सरपंचों के विजय जुलूस निकालने पर भी प्रतिबंध रहेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान शांति भंग करने, मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निषेधाज्ञा का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना तथा मतदाताओं को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना है।