हवाई सफर होगा महंगा! इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज, 6 अक्टूबर से नई दरें लागू

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नई दिल्ली। हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अब सफर का खर्च बढ़ने वाला है। देश की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो ने विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। नई दरें 6 अक्टूबर 2026 से की जाने वाली नई बुकिंग पर लागू होंगी।

कंपनी के मुताबिक, हाल के समय में ATF की कीमतों में तेज और लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अकेले पिछले महीने ईंधन की कीमत में 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे विमानन कंपनियों की परिचालन लागत पर दबाव बढ़ा है। इसी वजह से इंडिगो ने फ्यूल चार्ज में संशोधन किया है।

घरेलू उड़ानों पर कितना बढ़ेगा शुल्क?

नई व्यवस्था के तहत घरेलू उड़ानों में ईंधन शुल्क दूरी के हिसाब से अलग-अलग रहेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार घरेलू मार्गों पर यह शुल्क 375 रुपए से लेकर 1,300 रुपए तक होगा। यानी लंबी दूरी की उड़ानों के यात्रियों पर अपेक्षाकृत अधिक अतिरिक्त भार पड़ सकता है।

इससे पहले की दरों की तुलना में घरेलू उड़ानों पर शुल्क में लगभग 100 से 350 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर नई बुकिंग करने वाले यात्रियों के कुल किराये पर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का सफर भी महंगा

इंडिगो ने केवल घरेलू मार्गों तक ही शुल्क वृद्धि सीमित नहीं रखी है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी फ्यूल चार्ज बढ़ाया गया है। गंतव्य के आधार पर अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर नया शुल्क 1,000 रुपए से 10,000 रुपए तक हो सकता है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में लंबी दूरी के यात्रियों को टिकट की मूल कीमत के अलावा ईंधन शुल्क के रूप में अधिक राशि चुकानी पड़ सकती है।

क्यों बढ़ाया गया फ्यूल चार्ज?

इंडिगो ने शुल्क बढ़ाने के पीछे मुख्य वजह ATF की बढ़ती कीमतों को बताया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण विमान ईंधन की लागत पर दबाव बना हुआ है। एयरलाइन का कहना है कि बढ़ती ईंधन लागत को देखते हुए शुल्क में संशोधन आवश्यक हो गया है।

नई व्यवस्था के बाद 6 अक्टूबर से इंडिगो की नई टिकट बुक करने वाले यात्रियों को दूरी और गंतव्य के आधार पर पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। इससे आने वाले दिनों में हवाई यात्रा की कुल लागत पर भी असर पड़ने की संभावना है।