वीरमणि POCSO मामले में DMK को अदालत की मंजूरी, दो TVK मंत्रियों और IT विंग पर मानहानि का मुकदमा करेगी पार्टी

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चेन्नई। तमिलनाडु के चर्चित वीरमणि POCSO मामले को लेकर राजनीतिक विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को तमिझगा वेट्री कषगम (TVK) के दो मंत्रियों आधव अर्जुन और सीटीआर निर्मल कुमार तथा पार्टी की आईटी विंग के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी। DMK ने इस मामले में 1.01 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलाकावती ने DMK महासचिव दुरईमुरुगन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुकदमा दायर करने की अनुमति दी। अदालत का सोमवार का आदेश फिलहाल मुकदमा आगे बढ़ाने की अनुमति तक सीमित है। इससे यह तय नहीं होता कि संबंधित बयान कानूनी रूप से मानहानिकारक हैं या मामले में किस पक्ष का दावा सही है।

क्या है विवाद?

यह विवाद ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि के खिलाफ दर्ज POCSO मामले को लेकर शुरू हुआ। TVK के मंत्रियों और पार्टी की आईटी विंग की ओर से कथित तौर पर ऐसे बयान और सोशल मीडिया पोस्ट किए गए, जिनमें आरोप लगाया गया कि पिछली DMK सरकार ने वीरमणि के खिलाफ कार्रवाई नहीं की या मामले में उचित कदम नहीं उठाए। DMK ने इन आरोपों को गलत और अपनी छवि खराब करने वाला बताया है।

DMK महासचिव दुरईमुरुगन ने अदालत में दलील दी कि पार्टी और उसकी तत्कालीन सरकार को लेकर किए गए ये आरोप तथ्यहीन हैं। पार्टी के मुताबिक, वीरमणि के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की थी और 7 अक्टूबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। DMK ने कहा कि जांच में पार्टी की ओर से किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया गया।

मंत्रियों की ओर से क्या आपत्ति थी?

मामले की सुनवाई के दौरान TVK मंत्रियों की ओर से याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति उठाई गई। बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि मंत्रियों के खिलाफ मुकदमा शुरू करने से पहले आवश्यक कानूनी नोटिस की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

इसके जवाब में DMK की ओर से कहा गया कि दोनों मंत्रियों को उनके सार्वजनिक पद के आधार पर नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत रूप से दिए गए कथित बयानों के संबंध में पक्षकार बनाया गया है। हाईकोर्ट ने इन आपत्तियों के बावजूद DMK को मानहानि की कार्यवाही आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।

राजनीतिक विवाद ने लिया कानूनी रूप

वीरमणि मामले को लेकर DMK और TVK के बीच पहले से ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। अब हाईकोर्ट की अनुमति के बाद विवाद का एक हिस्सा न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश कर गया है।

DMK ने मंत्रियों और TVK की आईटी विंग के अलावा सोशल मीडिया से जुड़े कुछ प्लेटफॉर्मों पर आपत्तिजनक सामग्री हटाने संबंधी राहत की मांग भी की थी। अब मानहानि मामले की आगे की सुनवाई में संबंधित पक्ष अपने-अपने दावे और साक्ष्य अदालत के सामने रखेंगे।