पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस ने कसी कमर, डोटासरा बोले- जीत के लिए एकजुट होकर मैदान में उतरें नेता-कार्यकर्ता

0

जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वार रूम में बुधवार को आयोजित कैंपेन कमेटी की बैठक में चुनाव प्रचार की रणनीति, संगठनात्मक समन्वय और जमीनी स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाने को लेकर विस्तार से मंथन किया गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ काम करना होगा। उन्होंने कहा कि चुनाव में पार्टी की सफलता केवल प्रत्याशियों पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि संगठन के प्रत्येक स्तर के कार्यकर्ता की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस का फोकस स्थानीय संगठन पर

कांग्रेस की रणनीति में इस बार स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिखाई दे रहा है। हाल ही में पार्टी की बैठकों में भी स्थानीय उम्मीदवारों, संगठन के बेहतर तालमेल और समय रहते चुनावी तैयारी पूरी करने पर चर्चा हुई है।

कैंपेन कमेटी की बैठक में नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पंचायत चुनाव विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग प्रकृति के होते हैं। यहां प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय संपर्क, सामाजिक समीकरण और गांव-गांव तक संगठन की पहुंच चुनाव परिणाम पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। ऐसे में कांग्रेस अब बूथ और पंचायत स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

निकाय चुनाव के अनुभव से सबक लेने पर जोर

डोटासरा ने हाल में हुए निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए भाजपा पर चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष इससे पहले भी निकाय चुनावों को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा चुके हैं और डीजीपी से मुलाकात कर जांच की मांग कर चुके हैं।

कांग्रेस के लिए हालिया निकाय चुनावों का अनुभव भी पंचायत चुनाव से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी ने कथित क्रॉस-वोटिंग और संगठन के भीतर अनुशासनहीनता की शिकायतों की जांच के लिए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय समिति गठित की है। पार्टी के भीतर सामने आए इन मतभेदों के बाद पंचायत चुनाव में एकजुटता को कांग्रेस नेतृत्व खास महत्व दे रहा है।

गहलोत-पायलट समेत वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी

पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं को भी अभियान से जोड़ने की रणनीति बनाई है। बुधवार की बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को संगठन में एकजुटता के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट समेत पार्टी के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी से कांग्रेस ने यह संकेत देने की कोशिश की कि स्थानीय चुनाव में सभी प्रमुख नेता मिलकर संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे।

बैठक के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय, स्थानीय स्तर पर चुनावी प्रबंधन और प्रचार अभियान को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। पार्टी का प्रयास है कि उम्मीदवारों की घोषणा के बाद चुनाव प्रचार में किसी तरह की अंदरूनी खींचतान सामने न आए।

टिकट वितरण में स्थानीय समीकरणों पर नजर

पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के चयन को कांग्रेस काफी अहम मान रही है। पार्टी स्तर पर दावेदारों से संबंधित स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक जानकारी जुटाई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार उम्मीदवार चयन में क्षेत्रीय प्रभाव, सामाजिक समीकरण, संगठन से जुड़ाव और सोशल मीडिया सक्रियता जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

कांग्रेस की कोशिश है कि पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा जाए जिनकी अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ हो और जो स्थानीय स्तर पर भाजपा को चुनौती दे सकें।

चुनाव कार्यक्रम के साथ तेज होगा प्रचार

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 का कार्यक्रम जारी हो चुका है। चुनाव चार चरणों में कराए जाने हैं और नामांकन प्रक्रिया 8 अक्टूबर से शुरू होनी है। पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव के साथ सरपंच और पंच पदों के लिए भी चुनाव होंगे। वरिष्ठ पदों के चुनाव और मतगणना की प्रक्रिया 25 नवंबर को निर्धारित की गई है।

चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद अब दोनों प्रमुख दलों की गतिविधियां गांवों तक तेजी से पहुंचने की संभावना है। कांग्रेस ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनावी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया है।

कांग्रेस के सामने चुनौती संगठन को एकजुट रखने की

हालिया निकाय चुनावों के दौरान सामने आई क्रॉस-वोटिंग, बगावत और स्थानीय स्तर के विवादों ने कांग्रेस के सामने संगठनात्मक एकता की चुनौती रखी है। पार्टी नेतृत्व अब पंचायत चुनाव में ऐसी स्थिति दोहराने से बचना चाहता है। इसी वजह से डोटासरा लगातार नेताओं और कार्यकर्ताओं से आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में काम करने की अपील कर रहे हैं।

पंचायत चुनाव कांग्रेस के लिए ग्रामीण राजस्थान में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। ऐसे में पार्टी का पूरा जोर संगठन को बूथ से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय करने, मजबूत स्थानीय प्रत्याशी उतारने और वरिष्ठ नेताओं को प्रचार अभियान में शामिल करने पर रहेगा।

डोटासरा ने कार्यकर्ताओं से साफ तौर पर कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल टिकट हासिल करना पर्याप्त नहीं है। पार्टी के सभी नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रत्याशी के पक्ष में पूरी ताकत से मैदान में उतरना होगा। अब देखना होगा कि कांग्रेस की यह एकजुटता और नई चुनावी रणनीति ग्रामीण राजस्थान में उसे कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है।