रिफंड और पंजीकरण प्रक्रिया होगी आसान
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था को अधिक सरल और करदाताओं के लिए कम जटिल बनाने की दिशा में जीएसटी परिषद ने गुरुवार को कई महत्वपूर्ण सुधारों पर सहमति जताई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में इस बार जीएसटी दरों में बदलाव पर चर्चा नहीं हुई। सरकार का फोकस पिछले वर्ष दरों में किए गए बदलावों के बाद अब अनुपालन व्यवस्था को सरल बनाने और कर प्रशासन में सुधार पर रहा।
वित्त मंत्री ने बैठक के बाद बताया कि भविष्य में जीएसटी दरों की समीक्षा के लिए साल में एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी। यानी नियमित परिषद बैठकों में अनुपालन और प्रशासनिक मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
गिरफ्तारी का अधिकार खत्म, अभियोजन की सीमा बढ़ी
जीएसटी व्यवस्था में करदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव है। परिषद ने जीएसटी के तहत गिरफ्तारी के अधिकार को समाप्त करने की सिफारिश की है।
इसके साथ ही अभियोजन की कार्रवाई शुरू करने के लिए कर राशि की न्यूनतम सीमा को एक करोड़ रुपए से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का फैसला किया गया है। परिषद ने न्यूनतम सजा से संबंधित प्रावधान को भी हटाने की सिफारिश की है।
देर से रिटर्न दाखिल करने के मामलों में भी कार्रवाई को सीमित करने का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में मूल कर राशि की वसूली, उस पर ब्याज और निर्धारित जुर्माने की कार्रवाई के अलावा अतिरिक्त आपराधिक कार्रवाई नहीं किए जाने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
सप्लाई चेन में एक की गलती का असर सभी पर नहीं
बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को लेकर एक महत्वपूर्ण समस्या पर भी चर्चा हुई। वर्तमान व्यवस्था में आपूर्ति श्रृंखला में किसी एक पक्ष की गलती होने पर उससे जुड़े अन्य कारोबारियों का भी ITC रिफंड प्रभावित हो सकता है।
परिषद ने इस व्यवस्था की समीक्षा के लिए अधिकारियों की एक समिति गठित करने का फैसला किया है। समिति यह देखेगी कि गलती करने वाले पक्ष के ठीक बाद वाले पक्ष का रिटर्न रोका जाए और सप्लाई चेन से जुड़े बाकी कारोबारियों को अपना रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दी जाए।
समिति को करीब तीन महीने में रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद इसे जीएसटी परिषद के समक्ष रखा जाएगा। प्रस्तावित बदलाव को अगले वर्ष 1 अप्रैल से लागू किए जाने की दिशा में काम किया जाएगा।
दो लाख करदाताओं के लिए एकीकृत विंडो
वित्त मंत्री ने जीएसटी परिषद की बैठक से अलग केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अलग-अलग राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में केंद्रीय जीएसटी (CGST) के अधिकार क्षेत्र के कारण कुछ करदाताओं को अलग-अलग रिटर्न दाखिल करने पड़ते हैं।
सीजीएसटी के करीब 69.5 लाख करदाताओं में लगभग दो लाख ऐसे हैं, जिन्हें इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। इन करदाताओं के लिए एकीकृत विंडो उपलब्ध कराने का फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। इसे अगले वित्त वर्ष से लागू करने की योजना है।
रिफंड की मंजूरी प्रक्रिया होगी तेज
जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को भी आसान बनाने का फैसला किया गया है। रिफंड क्लेम के एक्नॉलेजमेंट में लगने वाला समय 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की घोषणा की गई है। इससे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी जल्द वापस मिलने की उम्मीद है। सरकार का जोर रिफंड प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर भी है।
जीएसटी पंजीकरण में दस्तावेजों को लेकर स्पष्टता
करदाताओं के लिए जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया में भी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। पंजीकरण के समय कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे, इसे लेकर अधिक स्पष्टता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रणाली के माध्यम से ही आवेदकों को जरूरी दिशा-निर्देश और सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान किया जाएगा। इससे नए कारोबारियों को पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सकती है।
छोटे कारोबारियों के लिए ई-कॉमर्स पंजीकरण आसान
परिषद ने छोटे आपूर्तिकर्ताओं के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने हेतु जीएसटी पंजीकरण को सरल बनाने की दिशा में भी कदम उठाया है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों को ऑनलाइन बाजार से जोड़ने में आने वाली अनुपालन संबंधी बाधाओं को कम करना है।
इसके अलावा करदाता पंजीकरण के समय दिए गए कुछ विवरणों में स्वयं संशोधन कर सकेंगे। पंजीकरण रद्द कराने के लिए दिए गए आवेदन को भी निर्धारित परिस्थितियों में स्वतः स्वीकार माना जाएगा, जिससे अनावश्यक विभागीय प्रक्रिया और प्रतीक्षा कम हो सकेगी।
सुधारों पर रहा बैठक का मुख्य फोकस
जीएसटी परिषद की इस बैठक में दरों में बदलाव के बजाय व्यवस्था को अधिक सरल, तकनीक आधारित और करदाता-अनुकूल बनाने पर जोर दिखाई दिया। गिरफ्तारी और अभियोजन के प्रावधानों में बदलाव से लेकर रिफंड, पंजीकरण, ITC और ई-कॉमर्स कारोबार से जुड़े सुधारों का उद्देश्य जीएसटी अनुपालन को आसान बनाना है।
वित्त मंत्री के अनुसार दरों की समीक्षा के लिए अलग बैठक की व्यवस्था किए जाने से परिषद को कर दरों और प्रशासनिक सुधारों पर अलग-अलग स्तर पर विचार करने का अवसर मिलेगा।



