लखनऊ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चलाया जा रहा विरोध महज चुनाव सुधार का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकार को अस्थिर करने और सत्ता परिवर्तन की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष बांग्लादेश में हुए घटनाक्रम से प्रेरणा लेकर भारत में भी हिंसा और अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन का मॉडल अपनाना चाहता है।
लखनऊ में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल को हिंसा या अराजकता के जरिए सत्ता बदलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति लोकतांत्रिक विरोध के बजाय टकराव और विघटन की दिशा में बढ़ रही है।
निशाना SIR या सीईसी नहीं, लोकतांत्रिक संस्थाएं
रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों का मौजूदा आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या एसआईआर के खिलाफ दिखाई जरूर देता है, लेकिन उनका वास्तविक उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की ऊर्जा को राजनीतिक टकराव और अराजकता की ओर मोड़ा जा रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ विपक्षी नेता खुले तौर पर सरकार बदलने की बात कर रहे हैं और बांग्लादेश के घटनाक्रम को सत्ता परिवर्तन के लिए प्रेरणा के तौर पर देख रहे हैं। उनके मुताबिक, इन बयानों से आंदोलन के पीछे के राजनीतिक उद्देश्य को समझा जा सकता है।
चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस पर लगाया पुराना आरोप
राजनाथ सिंह ने अपने आरोपों के समर्थन में चुनाव आयोग से जुड़े वर्ष 1993 के घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में चुनाव आयोग की संरचना में बदलाव किया गया था। उन्होंने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से तत्कालीन चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश का हवाला देते हुए कांग्रेस पर चुनाव आयोग को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि बाद में चावला मुख्य चुनाव आयुक्त के पद तक पहुंचे। राजनाथ सिंह ने इसी उदाहरण के आधार पर कांग्रेस के मौजूदा चुनाव आयोग संबंधी सवालों पर निशाना साधा और कहा कि जो पार्टी अपने शासनकाल में चुनाव आयोग को प्रभावित करने के आरोपों से घिरी रही, वही आज चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है।
मतदाता पहचान पत्र लागू होने के बाद कांग्रेस अकेले बहुमत में नहीं आई
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में मतदाता पहचान पत्र से जुड़े राजनीतिक इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1993 से पहले मतदाताओं की पहचान के लिए मौजूदा स्वरूप की मतदाता पहचान व्यवस्था नहीं थी। उनका कहना था कि मतदाता पहचान पत्र लागू होने के बाद कांग्रेस अपने दम पर केंद्र में सरकार बनाने में सफल नहीं हुई।
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के मौजूदा ‘वोट चोरी’ के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय उसका ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ रही है। उन्होंने विपक्ष से चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास बनाए रखने की अपील की।
कांग्रेस के ‘तीन अक्षम्य अपराध’ भी गिनाए
राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के शासनकाल से जुड़े कुछ ऐतिहासिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्हें पार्टी के ‘अक्षम्य अपराध’ बताया। इनमें 1975 का आपातकाल, 1984 के सिख विरोधी दंगे और 1990 में कारसेवकों पर हुई पुलिस कार्रवाई का उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की बात करने वाले नेताओं को अपने राजनीतिक आचरण पर भी आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि लोकतंत्र किसी को अराजकता फैलाने या हिंसा का रास्ता अपनाने की अनुमति नहीं देता। रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के बजाय राजनीतिक संघर्ष में इस्तेमाल कर रहे हैं।
कांग्रेस ने विरोध को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
दूसरी ओर, कांग्रेस और विपक्षी दल एसआईआर तथा चुनाव आयोग से जुड़े अपने विरोध को लोकतांत्रिक अधिकार और मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग से जोड़ते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैध राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।



