दिल्ली में दीपावली से पहले एक नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित है रैली
चांदनी चौक, सदर बाजार और खारी बावली के कारोबार पर असर की आशंका
नई दिल्ली। दीपावली से पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने विरोध जताया है। दिल्ली व्यापार महासंघ ने उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार को पत्र लिखकर रैली की बुकिंग रद्द करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान राजधानी के प्रमुख बाजारों में कारोबार चरम पर रहता है। ऐसे में बड़े राजनीतिक आयोजन के कारण यातायात प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था लागू होने से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बावेजा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने प्रशासन से आग्रह किया है कि जनहित, कारोबारियों की आजीविका और आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रैली के लिए किसी वैकल्पिक स्थान पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि दीपावली से पहले का समय थोक और खुदरा कारोबार के लिए पूरे साल के सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक दौर में शामिल है।
प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका
व्यापारियों के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली और चावड़ी बाजार जैसे बड़े व्यापारिक केंद्र हैं। त्योहारों के दौरान इन बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने के साथ माल की आपूर्ति और परिवहन भी तेज हो जाता है।
महासंघ ने आशंका जताई है कि महारैली के दौरान बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग, यातायात डायवर्जन और वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए जाने से कारोबार प्रभावित हो सकता है। संगठन का दावा है कि ऐसी स्थिति में दिल्ली के करीब 30 प्रतिशत थोक व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, यह आंकड़ा व्यापारिक संगठन की ओर से जताया गया अनुमान है।
व्यापारियों का कहना है कि बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होने पर ग्राहकों की संख्या घट सकती है और दुकानदारों को समय पर माल पहुंचाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दीपावली के दौरान कारोबारियों के लिए हर दिन महत्वपूर्ण होता है, इसलिए वे आयोजन के समय और स्थान पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।
अस्पतालों और रेलवे स्टेशन तक पहुंच को लेकर चिंता
महासंघ ने रैली के कारण यातायात व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। रामलीला मैदान के आसपास लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल, जीबी पंत अस्पताल, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और गुरु नानक आई सेंटर जैसे प्रमुख चिकित्सा संस्थान स्थित हैं। इसके अलावा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी यातायात दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापारियों के अनुसार, यदि रैली में बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और आसपास की सड़कों पर यातायात नियंत्रित किया जाता है, तो मरीजों, एंबुलेंस और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहेगी। महासंघ ने प्रशासन से मांग की है कि आयोजन संबंधी निर्णय लेते समय आपातकालीन सेवाओं और आम लोगों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए।
लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान, लेकिन कारोबार भी जरूरी
दिल्ली व्यापार महासंघ ने स्पष्ट किया है कि वह राजनीतिक दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करता है। संगठन की आपत्ति रैली के आयोजन से ज्यादा उसके समय और स्थान को लेकर है। व्यापारियों का कहना है कि दीपावली से ठीक पहले बाजारों में कामकाज प्रभावित होने से छोटे दुकानदारों, थोक कारोबारियों और माल परिवहन से जुड़े लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
महासंघ ने संबंधित अधिकारियों से रैली की मौजूदा बुकिंग रद्द करने और कार्यक्रम के लिए शहर से बाहर किसी वैकल्पिक स्थान पर विचार करने की अपील की है। संगठन का तर्क है कि इससे राजनीतिक कार्यक्रम भी आयोजित हो सकेगा और राजधानी के प्रमुख बाजारों तथा अस्पतालों के आसपास यातायात दबाव कम रखने में मदद मिलेगी।
पुलिस से NOC जारी होने की भी आई खबर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस की एक नवंबर को प्रस्तावित महारैली के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया है। रामलीला मैदान की बुकिंग 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक के लिए किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में व्यापारियों की ओर से बुकिंग रद्द करने की मांग के बीच अब प्रशासन के अगले कदम पर नजर रहेगी।
कांग्रेस की यह महारैली मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के विरोध अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। रैली की अनुमति रद्द होगी, आयोजन के स्थान में बदलाव किया जाएगा या तय कार्यक्रम के अनुसार ही महारैली होगी, इस पर संबंधित अधिकारियों के निर्णय के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल व्यापारिक संगठन ने अपनी आपत्तियां प्रशासन तक पहुंचा दी हैं। व्यापारियों की मांग है कि त्योहारों के इस महत्वपूर्ण दौर में कारोबार, जनसुरक्षा और आवश्यक सेवाओं को ध्यान में रखकर ऐसा निर्णय लिया जाए, जिससे राजनीतिक आयोजन के साथ आम लोगों की सुविधाएं भी प्रभावित न हों।



