सौरभ दास-आशुतोष रांका की जमानत सुनवाई वाले मजिस्ट्रेट को धमकी, अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज

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नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर चल रही कानूनी कार्रवाई के बीच दिल्ली में नया विवाद खड़ा हो गया है। दोनों नेताओं की जमानत और रिहाई से संबंधित कार्यवाही के दौरान विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) को कथित तौर पर धमकी भरा संदेश मिलने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अब अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि धमकी किसने दी थी।

इससे पहले पुलिस की ओर से इस मामले में गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, मजिस्ट्रेट की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

जमानत सुनवाई के दौरान सामने आया मामला

सौरभ दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर को CJP की ओर से आयोजित प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दोनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नारेबाजी और राष्ट्रीय ध्वज फहराने से जुड़े घटनाक्रम तथा आगे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

14 अक्टूबर को दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। पुलिस ने अदालत में दलील दी थी कि पूर्व में कानून के उल्लंघन की घटनाओं और जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा ऐसी गतिविधियों की आशंका को देखते हुए एहतियाती कार्रवाई जरूरी थी।

सुनवाई में देरी को लेकर CJP के आरोप

इसी बीच CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने के मुद्दे को लेकर अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई से जुड़े मामले की सुनवाई निर्धारित समय पर शुरू नहीं हुई और काफी देर बाद कार्यवाही हुई।

CJP की ओर से दावा किया गया कि मजिस्ट्रेट और सरकारी अभियोजक देर से पहुंचे तथा जमानत के मूल मुद्दे पर सुनवाई करने के बजाय कथित धमकी वाले संदेश का मामला सामने आ गया। पार्टी ने इसे दोनों नेताओं की रिहाई में देरी करने की कोशिश बताया है।

हालांकि, धमकी दिए जाने के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई आरोपी या उसका मकसद फिलहाल सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु भी यही है कि संदेश भेजने वाला व्यक्ति कौन है और उसका इस मामले से कोई संबंध है या नहीं।

CJP ने लगाए गंभीर आरोप

CJP की ओर से आरोप लगाया गया है कि प्रशासन और दिल्ली पुलिस दोनों नेताओं की हिरासत लंबी करने का प्रयास कर रहे हैं। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया के जरिए आरोप लगाया कि रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।

पार्टी का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने मजिस्ट्रेट को धमकी दी है तो उसके खिलाफ स्वतंत्र रूप से कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसका असर सौरभ दास और आशुतोष रांका की जमानत सुनवाई पर नहीं पड़ना चाहिए।

पहले भी रिहा हो चुके हैं CJP नेता

इस मामले में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को 10 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। अगले दिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने दीपके समेत तीनों की रिहाई का आदेश दिया था। पुलिस के अनुसार, उन्हें एक वर्ष तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपए के बॉन्ड के आधार पर रिहा किया गया था।

बाद में सौरभ दास और आशुतोष रांका को अलग कार्यवाही में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से विवाद और बढ़ गया। उनकी रिहाई को लेकर CJP की कानूनी टीम ने अदालत का रुख किया था।

अब जांच के घेरे में धमकी देने वाला

मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने के बाद दर्ज FIR ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। जांच एजेंसियां धमकी भरे संदेश के स्रोत, भेजने वाले व्यक्ति और उसके संभावित मकसद की पड़ताल कर रही हैं।

इस बीच सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर CJP और प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस की जांच में मजिस्ट्रेट को धमकी भेजने वाले व्यक्ति की पहचान कब तक सामने आती है और उसका CJP नेताओं की जमानत कार्यवाही से कोई संबंध निकलता है या नहीं।