शस्त्र पूजन और शारीरिक प्रदर्शन के साथ मनाया गया RSS का स्थापना दिवस
जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस एवं विजयादशमी के अवसर पर जयपुर महानगर की 292 बस्तियों में उत्सव आयोजित किए गए। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में हजारों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया। शस्त्र पूजन, शारीरिक कौशल प्रदर्शन और पथ संचलनों के जरिए संगठनात्मक अनुशासन, सामूहिकता और राष्ट्रभाव का संदेश दिया गया। शहर के अनेक क्षेत्रों में निकले पथ संचलनों का स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
जयपुर महानगर के विभिन्न नगरों और बस्तियों में आयोजित इन कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों के साथ समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों और मातृशक्ति की भी सहभागिता रही। गालव नगर, पॉन्ड्रिक नगर, झोटवाड़ा, करधनी नगर, विद्याधर नगर, मानसरोवर, जगतपुरा और पत्रकार कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों में स्वयंसेवक घोष की धुन पर कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े। एकसमान गति और अनुशासित पंक्तियों में निकले संचलनों ने आयोजन को आकर्षक स्वरूप दिया।
शस्त्र पूजन के साथ शारीरिक कौशल का प्रदर्शन
विजयादशमी उत्सव के अंतर्गत विभिन्न बस्तियों में शस्त्र पूजन किया गया। इसके बाद आयोजित शारीरिक प्रधान कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों ने दंड, योग, आसन और अन्य शारीरिक कौशलों का प्रदर्शन किया। आयोजनों में शारीरिक दक्षता, आपसी समन्वय, अनुशासन और सामूहिक सहभागिता को प्रमुखता दी गई।
पथ संचलनों के दौरान विभिन्न मार्गों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कई स्थानों पर स्थानीय समाजबंधुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रमों को सामाजिक सहभागिता का स्वरूप दिया। अलग-अलग बस्तियों में हुए आयोजनों के माध्यम से संघ की गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों को सामने रखा गया।
बौद्धिक सत्रों में संस्कृति, संगठन और राष्ट्र निर्माण पर जोर
विजयादशमी उत्सव के दौरान आयोजित बौद्धिक सत्रों में पर्व के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्यों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने विजयादशमी को शक्ति उपासना, शस्त्र पूजन और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताते हुए सामाजिक जीवन में एकता, सहयोग और समरसता की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं के अनुसार, संघ की स्थापना व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र के विकास की संकल्पना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा संघ की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा गया कि संगठित और जागरूक समाज राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पथ संचलन को अनुशासन, सामूहिकता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।
करधनी नगर में डॉ. रमेश अग्रवाल की उपस्थिति
करधनी नगर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में विजयादशमी के सांस्कृतिक महत्व के साथ समाज जीवन में एकता, समरसता और राष्ट्रभाव को मजबूत करने की आवश्यकता पर विचार रखे। कार्यक्रम में संगठन की भूमिका और सामाजिक दायित्वों को लेकर भी चर्चा हुई।
विभिन्न बस्तियों में पदाधिकारियों ने किया मार्गदर्शन
जयपुर महानगर के अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित उत्सवों में संघ के पदाधिकारियों और विभिन्न दायित्वों से जुड़े वक्ताओं ने स्वयंसेवकों तथा उपस्थित नागरिकों को संबोधित किया।
मधुबन बस्ती में राजस्थान क्षेत्र बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीकांत ने विचार रखे, जबकि विद्याधर नगर में जयपुर महानगर बौद्धिक शिक्षण प्रमुख अशोक गर्ग ने मार्गदर्शन किया। भगत सिंह बस्ती और सरदार पटेल नगर में नगर बौद्धिक शिक्षण प्रमुख रुबिन माथुर का बौद्धिक हुआ।
कुंदनपुरा बस्ती में जयपुर महानगर सहकार्यवाह रूप सिंह तथा भांकरोटा बस्ती में सह सेवा प्रमुख अशोक कुमार ने विचार व्यक्त किए। विवेकानंद नगर में भाग सह बौद्धिक प्रमुख नरेश सिंह ने संबोधित किया। वहीं, गालव भाग के गोविंद नगर में जयपुर प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख दिनेश मणिरत्नम ने मार्गदर्शन किया। ज्योति नगर बस्ती में सह संघचालक डॉ. मामराज गुप्ता ने अपने विचार रखे।
सरस्वती नगर की विभिन्न बस्तियों में भी बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें माधव, राजकुमार जैन, दुर्गेश खंडेलवाल, शंकर बाबू, जिला प्रचारक सुभाष कुमार और राजेंद्र आर्य ने वक्ता के रूप में विचार रखे। विभिन्न कार्यक्रमों में स्थानीय पदाधिकारियों, गणमान्य नागरिकों और समाज के लोगों की भागीदारी रही।
सामाजिक सहभागिता के साथ संपन्न हुए आयोजन
जयपुर महानगर की 292 बस्तियों में आयोजित विजयादशमी उत्सवों में पथ संचलन, शस्त्र पूजन और शारीरिक प्रदर्शन के साथ वैचारिक कार्यक्रम भी हुए। आयोजनों में अनुशासन, संगठनात्मक एकजुटता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता जैसे विषय केंद्र में रहे।
विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों की सहभागिता और पथ संचलनों के स्वागत ने इन आयोजनों को व्यापक सामाजिक उपस्थिति प्रदान की। संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के जरिए स्वयंसेवकों ने सामूहिकता, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया।






