हैदराबाद में एग डोनेशन रैकेट का किया भंडाफोड़, 43 महिलाओं को बचाया; 8 आरोपी अरेस्ट

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हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुलिस ने महिलाओं के कथित व्यावसायिक शोषण से जुड़े अंतरराज्यीय अवैध एग डोनेशन (अंडाणु दान) नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 43 महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि महिलाओं को आर्थिक लालच देकर अलग-अलग राज्यों से हैदराबाद बुलाया जाता था और उन्हें IVF तथा फर्टिलिटी सेवाओं से जुड़े केंद्रों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क में मेडिकल प्रक्रियाओं के नियमों के उल्लंघन और महिलाओं के संभावित शोषण की जांच कर रही है।

मलकाजगिरी कमिश्नरेट की स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT) ने बेगमपेट और सरूरनगर पुलिस के साथ मिलकर 30 और 31 अक्टूबर को शहर के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। प्रकाश नगर, बेगमपेट, एर्रागड्डा, सरूरनगर और गोपालपुरम में की गई कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों की 43 महिलाओं को सुरक्षित निकाला गया।

20 से 30 हजार रुपए देने का दिया जाता था लालच

प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े एजेंट महिलाओं को प्रत्येक एग डोनेशन साइकिल के बदले 20 हजार से 30 हजार रुपए देने का प्रलोभन देते थे। इसके लिए पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में एजेंटों के माध्यम से महिलाओं से संपर्क किया जाता था।

आरोप है कि महिलाओं के हैदराबाद आने-जाने की व्यवस्था करने के साथ उन्हें किराए के मकानों और हॉस्टल में ठहराया जाता था। इसके बाद उन्हें फर्टिलिटी सेवाओं से जुड़े लोगों और केंद्रों तक पहुंचाया जाता था।

कुछ महिलाओं ने पुलिस को बताया कि प्रस्तावित प्रक्रिया की तैयारी के लिए उन्हें हार्मोनल इंजेक्शन और दवाइयां दी गई थीं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कितनी महिलाओं को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ा और क्या किसी महिला के साथ उसकी सहमति के बिना कोई मेडिकल प्रक्रिया की गई थी।

हार्मोनल इंजेक्शन और दवाइयां बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस ने पांच शीशियां ह्यूमोग एचपी 150 आईयू इंजेक्शन, एक सिरिंज, दो सुइयां तथा प्रिमोलुट और मेप्रेट टैबलेट बरामद की हैं। इसके अलावा मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य सामग्री भी जब्त की गई है।

जांचकर्ताओं को संदेह है कि कुछ मेडिकल प्रक्रियाएं अधिकृत चिकित्सकीय निगरानी के बिना कराई गई होंगी। साथ ही बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण से संबंधित निर्धारित नियमों के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। जब्त दवाइयों और मेडिकल सामग्री की जांच कराई जा रही है।

दो साल से किराए के मकान से संचालित हो रहा था नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, अमित शर्मा नामक आरोपी पिछले करीब दो वर्षों से बेगमपेट के प्रकाश नगर में किराए का परिसर लेकर कथित तौर पर इस गतिविधि का संचालन कर रहा था। इसके लिए वह प्रतिमाह करीब 50 हजार रुपए किराया देता था।

जांच में निक्कत परवीन की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि वह एजेंटों के माध्यम से महिलाओं की भर्ती करने तथा उनके हैदराबाद आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था करने में मदद करती थी।

पुलिस ने अमित शर्मा और निक्कत परवीन के अलावा रेशमा खातून, मेघावत श्रीनिवास उर्फ सोनू, जेप्रे प्रदीप, एसके परवीन, विजय भगवान राव सालुंके और पंकज सोनी को भी गिरफ्तार किया है। आरोपियों की भूमिका के अनुसार भर्ती, मेडिकल समन्वय, दस्तावेज तैयार करने और मध्यस्थता से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सरूरनगर के कारोबारी एमिरेशेट्टी दुर्गा प्रसाद की एक संबंधित मामले में अलग से गिरफ्तारी का भी उल्लेख है।

IVF सेंटरों और ART बैंकों की भूमिका जांच के दायरे में

पुलिस अब इस नेटवर्क के संपर्क में रहे IVF सेंटरों, फर्टिलिटी संस्थानों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बैंकों की भूमिका की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि महिलाओं की भर्ती करने वाले एजेंटों और संबंधित संस्थानों के बीच किस तरह का आर्थिक लेन-देन होता था।

जांच एजेंसियां महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड, सहमति पत्र, पहचान संबंधी दस्तावेज, बैंक लेन-देन और कथित तौर पर दी गई रकम का ब्योरा जुटा रही हैं। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं महिलाओं को बार-बार एग डोनेशन के लिए तो नहीं बुलाया गया था।

तीन मामले दर्ज, ART एक्ट के तहत भी कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण में बेगमपेट थाने में अपराध संख्या 763/2026 तथा सरूरनगर थाने में अपराध संख्या 1145/2026 और 1146/2026 के तहत तीन मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की संबंधित धाराओं के साथ असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 की धारा 33(2) और 34 के तहत कार्रवाई की है।

मलकाजगिरी पुलिस कमिश्नर बी. सुमति की निगरानी में चल रही जांच में अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित संस्थागत संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि महिलाओं को किस स्तर तक इस कथित अवैध गतिविधि में शामिल किया गया और मेडिकल नियमों का कहां-कहां उल्लंघन हुआ।