तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 2013 के रेप मामले में 10 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार

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नई दिल्ली। तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को बड़ा झटका लगा। शीर्ष अदालत ने उनकी 10 साल की जेल की सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान, ईमेल और रिकॉर्ड पर मौजूद संदेशों को प्रथम दृष्टया देखते हुए कहा कि फिलहाल सजा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने तेजपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत देने से इनकार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए सजा निलंबित करना उचित नहीं होगा।

लिफ्ट की तकनीकी स्थिति को लेकर बचाव पक्ष की दलील

तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि गोवा के एक होटल की लिफ्ट में कथित घटना के समय दरवाजे खुलने की तकनीकी संभावना मौजूद थी। उन्होंने लिफ्ट की आवाजाही से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों का हवाला देते हुए अभियोजन पक्ष की कहानी पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटना के समय लिफ्ट के दरवाजे खुले थे और इस पहलू पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पर्याप्त विचार नहीं किया।

सिब्बल ने शिकायतकर्ता के अलग-अलग बयानों में कथित विरोधाभासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तेजपाल सुनवाई के दौरान जमानत पर रहे और उन्होंने कभी अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया।

गोवा सरकार ने किया याचिका का विरोध

गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सजा निलंबित करने की मांग का विरोध किया। उन्होंने अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों के साथ तेजपाल की ओर से भेजे गए संदेशों और माफी वाले ईमेल का हवाला दिया।

मेहता ने दलील दी कि घटना के बाद भेजे गए संदेश और ईमेल मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निचली अदालत के फैसले में पीड़िता के व्यवहार को लेकर की गई टिप्पणियां उचित नहीं थीं। गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दायर कर तेजपाल को दी गई 10 साल की सजा बढ़ाकर आजीवन कारावास करने की मांग भी की है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पलटा था बरी करने का फैसला

यह मामला नवंबर 2013 का है। गोवा में तहलका पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर होटल की लिफ्ट में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। मामले में गोवा की निचली अदालत ने वर्ष 2021 में तेजपाल को बरी कर दिया था।

इसके बाद पीड़िता और राज्य सरकार की ओर से फैसले को चुनौती दी गई। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने 6 अगस्त 2026 को निचली अदालत का फैसला पलटते हुए तेजपाल को दुष्कर्म का दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निचली अदालत की ओर से पीड़िता के व्यवहार और उसकी प्रतिक्रिया को लेकर की गई टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट में मुख्य अपील पर सुनवाई जारी रहेगी

हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए तेजपाल ने 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष अदालत ने पहले उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्होंने सितंबर में जेल में समर्पण किया।

शुक्रवार को सजा निलंबित करने की याचिका खारिज होने के बावजूद तेजपाल की दोषसिद्धि के खिलाफ मुख्य अपील पर सुनवाई का रास्ता खुला रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने गोवा सरकार की सजा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई स्वीकार की है। इस तरह मामले में अब दो महत्वपूर्ण सवाल शीर्ष अदालत के समक्ष हैं-तेजपाल की दोषसिद्धि को चुनौती और राज्य सरकार की ओर से सजा बढ़ाने की मांग।