जयपुर। अधिवक्ता परिषद राजस्थान जयपुर प्रांत की हाईकोर्ट इकाई की ओर से शुक्रवार को लहरिया महोत्सव एवं व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। आयोजन में ‘भारतीय संविधान और सांस्कृतिक परंपराएं’ विषय पर व्याख्यान आयोजित कर संविधान की मूल भावना और भारतीय संस्कृति के बीच संबंधों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय मंत्री कमल परसावल तथा धर्मशास्त्र विद्याशाखा एवं भारतीय विधिशास्त्र विद्याशाखा के विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्ण शर्मा रहे। दोनों वक्ताओं ने भारतीय संविधान की मूल भावना और प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं के अंतर्संबंधों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे को भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जड़ों से जोड़ना आवश्यक है।
कार्यक्रम का मंच संचालन दीक्षा मिश्रा एवं गुंजन चावला ने किया। इस अवसर पर प्रांत की प्रमुख महिला पदाधिकारियों एवं महिला अधिवक्ताओं ने भी सहभागिता की। इनमें डिप्टी गवर्नमेंट काउंसिल वंदना शर्मा, असिस्टेंट गवर्नमेंट काउंसिल श्रुति पारीक, असिस्टेंट महाधिवक्ता नेहा गोयल, अतिरिक्त गवर्नमेंट एडवोकेट मंजू देवे, निधि स्वालखा, ऋतु शर्मा तथा असिस्टेंट गवर्नमेंट काउंसिल सुनीता मीणा सहित अन्य अधिवक्ता शामिल रहे।
व्याख्यान माला के समापन के बाद आयोजन में राजस्थानी संस्कृति के रंग देखने को मिले। पारंपरिक लहरिया लोकगीतों पर महिला अधिवक्ताओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इससे कार्यक्रम स्थल का माहौल पूरी तरह लहरिया के रंग में रंग गया। इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए विभिन्न मनोरंजक प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
कार्यक्रम में उच्च न्यायालय इकाई के महामंत्री धर्मेंद्र बराला, जयराम गुर्जर सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे। उपस्थित अधिवक्ताओं ने संविधान और संस्कृति के इस अनूठे संयोजन की सराहना करते हुए इसे कानूनी क्षेत्र में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।



