नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना को शनिवार को नया प्रमुख मिल गया। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने 31 अक्टूबर को वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (एपी सिंह) का स्थान लिया, जो 42 वर्ष की विशिष्ट सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो गए।
कार्यभार हस्तांतरण से पहले निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एपी सिंह को नई दिल्ली में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने वायुसेना की कमान नए प्रमुख आशुतोष दीक्षित को सौंपी।
चार दशक का सैन्य अनुभव
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। करीब चार दशक के सैन्य करियर में उन्होंने ऑपरेशनल ड्यूटी, विमान परीक्षण, सैन्य क्षमता विकास और संयुक्त रक्षा सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं।
वे अनुभवी फाइटर पायलट होने के साथ क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। उनके पास 3,300 से अधिक घंटे की उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग सीरीज के विभिन्न विमानों, जगुआर और अन्य परिवहन एवं प्रशिक्षण विमानों सहित कई तरह के एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं।
तेजस और लड़ाकू विमानों के आधुनिकीकरण में भूमिका
वायुसेना के आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाओं में दीक्षित की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने जगुआर और मिग-27 विमानों के अपग्रेड कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने में योगदान दिया। इसके अलावा स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस एमके-1 के प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (IOC) और अंतिम परिचालन मंजूरी (FOC) से जुड़ी गतिविधियों में भी उनकी भूमिका रही।
अपने परिचालन अनुभव के दौरान उन्होंने मिराज-2000 स्क्वाड्रन, पश्चिमी क्षेत्र में अग्रिम वायुसेना सहायता इकाई और वायुसेना स्टेशन बीदर जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की कमान संभाली। बीदर वायुसेना का प्रमुख लड़ाकू विमान प्रशिक्षण केंद्र है।
कई अहम पदों पर कर चुके हैं काम
उच्च सैन्य पदों पर रहते हुए दीक्षित ने दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर और दक्षिण पश्चिमी वायु कमान में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद वे वायुसेना के उप प्रमुख बने और सैन्य क्षमता विकास तथा रक्षा खरीद से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं में योगदान दिया।
वे केंद्रीय वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के रूप में संयुक्त सैन्य समन्वय से जुड़े दायित्व निभाए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी वे इस पद पर कार्यरत थे। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले वे उप वायुसेना प्रमुख के पद पर तैनात थे।
कई सैन्य सम्मानों से हो चुके हैं सम्मानित
दीक्षित ने बांग्लादेश स्थित डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
नए वायुसेना प्रमुख के सामने लड़ाकू विमानों की उपलब्धता बढ़ाने, स्वदेशी रक्षा तकनीक को प्रोत्साहन देने, आधुनिक निगरानी और वायु रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रहेंगी।



