पैरोल पर उज्जैन पहुंचे आसाराम को सीने में दर्द, पंचकर्म कराने अस्पताल नहीं गए; आश्रम में किया आराम

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उज्जैन/जोधपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की तबीयत शुक्रवार को बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के बाद वे उज्जैन स्थित शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पंचकर्म उपचार के लिए नहीं पहुंचे और अंकपात रोड स्थित आश्रम में ही आराम किया। आसाराम राजस्थान हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आसाराम 21 अक्टूबर को उज्जैन पहुंचे थे। उन्होंने बुधवार और गुरुवार को धन्वंतरि आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पंचकर्म उपचार कराया, लेकिन शुक्रवार को सीने में दर्द की शिकायत के चलते अस्पताल जाने का कार्यक्रम टाल दिया गया। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।

सिर और कमर दर्द के उपचार के लिए पंचकर्म

चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार आसाराम लंबे समय से सिर और कमर दर्द की समस्या से परेशान हैं। इसी के उपचार के लिए उन्हें 14 दिन तक पंचकर्म कराने की सलाह दी गई है। शुक्रवार को तबीयत बिगड़ने के कारण उनका उपचार प्रभावित हुआ। स्वास्थ्य में सुधार होने पर दोबारा अस्पताल जाने की संभावना जताई गई थी।

राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर मिली पैरोल

आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। राजस्थान हाईकोर्ट ने अगस्त में स्वास्थ्य और उम्र संबंधी आधारों पर उन्हें 20 दिन की पैरोल देने की मंजूरी दी थी। हालांकि, आदेश के बावजूद रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर आसाराम की ओर से अदालत में फिर याचिका दायर की गई।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने गुजरात में दूसरे दुष्कर्म मामले में मिली सजा और वहां पैरोल संबंधी राहत नहीं मिलने का हवाला दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि दूसरे राज्य में सजा या कार्यवाही होना पहले से दिए गए पैरोल आदेश की पालना रोकने के लिए अपने आप में पर्याप्त आधार नहीं है।

6 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने दिए थे निर्देश

पैरोल आदेश की पालना से जुड़े मामले में छह अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आसाराम को रिहा करने के पूर्व आदेश का पालन करने और अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद आसाराम पैरोल पर जेल से बाहर आए और उपचार के लिए उज्जैन पहुंचे। आसाराम की पैरोल की अवधि सीमित है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जेल लौटने को लेकर आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।