मोदी के दिवंगत पिता पर खरगे की टिप्पणी से गरमाई सियासत, दिल्ली में भाजपा का प्रदर्शन

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। सोमवार को दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने राजा जी मार्ग स्थित खरगे के आवास के निकट विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

प्रदर्शन में भाजपा के युवा मोर्चा, पूर्वांचल मोर्चा और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोर्चा के कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी नेताओं के अनुसार, करीब दो हजार कार्यकर्ता सेना भवन के पास एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए खरगे के आवास की ओर बढ़ने लगे। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

पटना में दिए बयान से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। यह कार्यक्रम बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में खरगे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे थे। इसी दौरान श्रोताओं में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर टिप्पणी की।

इसके जवाब में खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा, बाप भी जाएगा। इस बयान को लेकर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति अपमानजनक बताते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया।

भाजपा ने राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा उठाया

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर हैं और उनके परिवार को लेकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि खरगे अपने बयान के लिए माफी मांगें। भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि माफी नहीं मांगने पर पार्टी का विरोध जारी रहेगा।

कांग्रेस ने दी अलग सफाई

विवाद पर कांग्रेस की ओर से भाजपा के आरोपों का विरोध किया गया। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के अनुसार, पटना में खरगे के भाषण के दौरान पहले उनके दिवंगत पिता को लेकर टिप्पणी की गई थी। कांग्रेस ने दावा किया कि खरगे का संदर्भ प्रधानमंत्री के वैचारिक आधार के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर था, न कि उनके जैविक पिता की ओर।

इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा इसे राजनीतिक शिष्टाचार और प्रधानमंत्री के परिवार के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस ने बयान के संदर्भ को लेकर अपनी सफाई दी है।