डीग में एएसआई पर रिश्वतखोरी का केस, साइबर अपराध मामले में पैसे लेने का आरोप

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कामां थाने में तैनाती के दौरान रिश्वत मांगने की शिकायत का सत्यापन, एसीबी ने दर्ज किया मामला
डीग। राजस्थान के डीग जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने पुलिस विभाग के एक सहायक उप निरीक्षक के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोपी एएसआई की पहचान जय सिंह के रूप में हुई है। वह वर्तमान में डीग जिले के कुम्हेर थाने में तैनात बताया जा रहा है। आरोप कामां थाने में तैनाती के दौरान साइबर अपराध से जुड़े एक मामले में रिश्वत लेने से संबंधित है।

एसीबी सूत्रों के अनुसार, सहायक उप निरीक्षक जय सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच और सत्यापन की कार्रवाई के बाद आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाने पर प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

साइबर अपराध मामले में रिश्वत मांगने का आरोप

जानकारी के अनुसार, जय सिंह जब कामां थाने में तैनात थे, उस दौरान साइबर अपराध से जुड़े एक प्रकरण को लेकर शिकायतकर्ता से कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अब भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हालांकि, मामले में रिश्वत की कथित रकम कितनी थी और किस काम के बदले इसकी मांग की गई थी, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

धौलपुर में जीरो नंबर पर मामला दर्ज

एसीबी के पुलिस महानिदेशक गोविंद गुप्ता के निर्देश पर इस मामले में धौलपुर में जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी है। इसके बाद प्रकरण को संबंधित थाना क्षेत्र में कार्रवाई के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

एसीबी की ओर से शिकायत के सत्यापन के बाद मामला दर्ज किया जाना जांच की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है। अब जांच के दौरान शिकायत से जुड़े दस्तावेज, बातचीत और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

रिश्वतखोरी के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद अब एसीबी की जांच में यह स्पष्ट होगा कि आरोपी पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर किस परिस्थिति में रिश्वत की मांग की और इस संबंध में उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य कितने मजबूत हैं।

फिलहाल एएसआई जय सिंह के खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप में प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।