IOCL, BPCL और HPCL ने सैंपल लेने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
बेंगलूरु। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर केंद्र और कर्नाटक सरकार के बीच विवाद गहराता जा रहा है। कर्नाटक सरकार की ओर से पेट्रोल के कुछ नमूनों में 26 से 31 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलने का दावा किए जाने के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) ने जांच के नतीजों को चुनौती दी है। कंपनियों ने राज्य सरकार की सैंपलिंग प्रक्रिया और जांच पद्धति पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।
तीनों कंपनियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि कर्नाटक सरकार की ओर से सामने रखे गए निष्कर्ष निर्धारित वैधानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के अनुरूप की गई जांच पर आधारित नहीं हैं। कंपनियों के अनुसार, उनके द्वारा देशभर में आपूर्ति किया जा रहा E-20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानक IS 17021 के अनुरूप है।
अक्टूबर में सैंपलिंग प्रक्रिया पर उठाए सवाल
तेल कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल के नमूने लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, प्रयोगशाला में जांच कराने और परिणामों की सूचना देने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पहले से निर्धारित है। यह प्रक्रिया आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी मोटर स्पिरिट एवं हाई स्पीड डीजल नियंत्रण आदेश 2005 तथा मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस (MDG) 2024 में दी गई है।
नियमों के अनुसार, प्रत्येक स्थान से छह एक-लीटर नमूने लिए जाने चाहिए। इनमें से दो नमूने संबंधित पेट्रोल पंप डीलर को रसीद के साथ दिए जाते हैं, दो तेल कंपनी अथवा विभाग के पास सुरक्षित रखे जाते हैं और दो निर्धारित प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे जाते हैं। नमूनों के लेबल पर संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर और निर्धारित समय में जांच परिणामों की सूचना देना भी जरूरी है।
कंपनियों का आरोप है कि सितंबर 2026 में हुई सैंपलिंग निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई थी, लेकिन अक्टूबर में लिए गए नमूनों के दौरान तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया। कंपनियों को संबंधित सुरक्षित नमूने, पेट्रोल पंपवार पूरी जानकारी और प्रयोगशाला की विस्तृत रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
थर्ड पार्टी लैब की रिपोर्ट पर भी सवाल
तेल कंपनियों ने कहा कि कर्नाटक सरकार की ओर से प्रस्तुत जांच प्रमाणपत्रों में एथेनॉल प्रतिशत का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन इस्तेमाल की गई मानक परीक्षण पद्धति, आवश्यक डायल्यूशन प्रक्रिया और संदर्भ सामग्री जैसी तकनीकी जानकारियां स्पष्ट नहीं हैं।
कंपनियों के मुताबिक, केवल एथेनॉल प्रतिशत का उल्लेख होने से यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि जांच निर्धारित IS 17021 पद्धति के अनुसार हुई है। उन्होंने कहा कि तीसरी पार्टी की प्रयोगशाला से जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर 26 से 31 प्रतिशत एथेनॉल की मात्रा के दावों का स्वतंत्र सत्यापन संभव नहीं है।
893 नमूनों की जांच में 19 से 21 प्रतिशत एथेनॉल का दावा
तेल कंपनियों ने अपने पक्ष में केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत सेंटर फॉर हाई टेक्नोलॉजी (CHT) की निगरानी में किए गए गुणवत्ता परीक्षणों का हवाला दिया है।
कंपनियों के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में IOCL, BPCL और HPCL के डिपो तथा पेट्रोल पंपों से कुल 893 ई-20 पेट्रोल के नमूने एकत्र किए गए। इनमें इंडियन ऑयल के 330, भारत पेट्रोलियम के 280 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 283 नमूने शामिल थे। सभी नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 19 से 21 प्रतिशत के दायरे में पाई गई।
कंपनियों ने विशेष रूप से कर्नाटक के 56 नमूनों की जांच का उल्लेख किया है। इनके मुताबिक, इन नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही और औसत मात्रा 19.30 प्रतिशत दर्ज की गई।
संयुक्त जांच के लिए कर्नाटक सरकार से मांगे दस्तावेज
तीनों तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से पेट्रोल पंपवार जांच रिपोर्ट, नमूने लेने की पूरी प्रक्रिया और प्रयोगशाला की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही सुरक्षित रखे गए संबंधित नमूनों को उपलब्ध कराने की बात कही है, ताकि अधिकृत प्रयोगशाला में निर्धारित रेफरी पद्धति से दोबारा परीक्षण कराया जा सके।
कंपनियों ने सुझाव दिया है कि इस जांच में राज्य सरकार और तेल कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहें, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो सके।
कर्नाटक सरकार ने पहले लगाए थे अधिक एथेनॉल मिश्रण के आरोप
गौरतलब है कि कर्नाटक के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने राज्य के सात जिलों से पेट्रोल के 14 नमूनों की जांच के आधार पर दावा किया था कि 11 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा निर्धारित 20 प्रतिशत से अधिक मिली। इनमें इंडियन ऑयल के एक नमूने में 31.2 प्रतिशत और HPCL के एक नमूने में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलने की बात कही गई थी।
इस खुलासे के बाद ई-20 पेट्रोल की गुणवत्ता, वाहनों के माइलेज और उपभोक्ताओं के हितों को लेकर बहस तेज हो गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा था।
फिलहाल कर्नाटक सरकार की जांच और तेल कंपनियों के परीक्षण के निष्कर्षों में अंतर सामने आया है। ऐसे में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए दोनों पक्षों की मौजूदगी में स्वतंत्र और मानक प्रक्रिया के तहत दोबारा जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



