शिलांग/नई दिल्ली। पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के आठ विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और मेघालय भाजपा अध्यक्ष रिकमैन मोमिन की मौजूदगी में यह राजनीतिक बदलाव हुआ।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आठों विधायकों के पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत विधायकों के भाजपा में विलय के बाद मेघालय विधानसभा में भाजपा की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है। वहीं, यूडीपी के विधायकों की संख्या 12 से घटकर चार रह गई है।
भाजपा में शामिल हुए यूडीपी के ये आठ विधायक
भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पियूस मारवेइन, किर्मेन श्यल्ला, मायरालबोर्न सिएम, मैथ्यू कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीद कुपर सिनरेम और सिनशर लिंगदोह थबाह शामिल हैं।
इन विधायकों के भाजपा में आने से मेघालय में पार्टी की विधानसभा में मौजूदगी बढ़ी है। यह घटनाक्रम 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है।
विधानसभा में बदला दलों का संख्या बल
60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में इस विलय के बाद दलों का संख्याबल बदल गया है। भाजपा अब 10 विधायकों के साथ यूडीपी को पीछे छोड़ते हुए विधानसभा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
विधानसभा में नेशनल पीपुल्स पार्टी के 33 विधायक हैं। यूडीपी के आठ विधायकों के भाजपा में विलय के बाद क्षेत्रीय दल की संख्या चार रह गई है। भाजपा और यूडीपी दोनों मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के नेतृत्व वाली सरकार के सहयोगी हैं।
किरेन रिजिजू ने किया विधायकों का स्वागत
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भाजपा में शामिल हुए सभी आठ विधायकों का स्वागत करते हुए इसे मेघालय और पूर्वोत्तर के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बताया।
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में हुए विकास कार्यों और क्षेत्र के साथ बेहतर जुड़ाव से प्रभावित होकर विधायक भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्होंने इसे भाजपा के विस्तार के साथ-साथ पूर्वोत्तर की राजनीति के लिहाज से भी अहम बताया।
2028 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम घटनाक्रम
मेघालय में यूडीपी के आठ विधायकों का भाजपा में शामिल होना आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। इससे राज्य में भाजपा की विधायी ताकत बढ़ी है और यूडीपी की स्थिति में बदलाव आया है। हालांकि, इस घटनाक्रम का राज्य सरकार के कामकाज और आगामी चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।



