कराची। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सरफराज अहमद ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। इसके साथ ही उनके लगभग दो दशक लंबे शानदार करियर का अंत हो गया।
कराची में जन्मे इस विकेटकीपर-बल्लेबाज ने नवंबर 2007 में जयपुर में भारत के खिलाफ एकदिवसीय मैच से अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने 54 टेस्ट, 117 एकदिवसीय और 61 टी-20 मैच खेले, जिनमें उन्होंने 6,164 रन बनाए। इनमें छह शतक और 35 अर्धशतक शामिल हैं। विकेट के पीछे रहते हुए सरफराज ने 315 कैच लपके और 56 स्टंपिंग कीं।
सरफराज ने सभी फॉर्मेट को मिलाकर 100 अंतरराष्ट्रीय मैचों में पाकिस्तान की कप्तानी भी की, जिनमें 50 एकदिवसीय, 37 टी-20 और 13 टेस्ट मैच शामिल हैं। उनकी कप्तानी में पाकिस्तान टी-20 रैंकिंग में नंबर 1 स्थान पर पहुंचा और लगातार 11 टी-20 सीरीज जीतने का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
उनकी कप्तानी को सबसे ज़्यादा 2017 में इंग्लैंड में हुई आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान की जीत के लिए याद किया जाता है। इस टूर्नामेंट के फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 180 रनों से हराकर आठ साल से चले आ रहे आईसीसी खिताब के सूखे को खत्म किया था।
इस जीत के साथ ही सरफराज पाकिस्तान के ऐसे एकमात्र कप्तान बन गए, जिन्होंने जूनियर और सीनियर, दोनों ही स्तरों पर पाकिस्तान को आईसीसी खिताब दिलाया। इससे पहले उन्होंने 2006 में श्रीलंका में हुए अंडर-19 विश्व कप में भी टीम की कप्तानी करते हुए जीत दिलाई थी।
क्रिकेट में उनके योगदान को देखते हुए, 2018 में उन्हें पाकिस्तान के ‘प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही वह यह सम्मान पाने वाले पाकिस्तान के सबसे कम उम्र के कप्तान बन गए।
अपने करियर के बारे में सरफराज ने कहा कि पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करना मेरी जिदगी का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। 2006 में अंडर-19 टीम को विश्वकप के खिताब जिताने से लेकर 2017 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी उठाने तक, पाकिस्तान की जर्सी में बिताया हर पल मेरे लिए खास रहा है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए सभी प्रारुपों में कप्तानी करना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा था। मैंने हमेशा निडर क्रिकेट खेलने और एक एकजुट टीम बनाने की कोशिश की। मेरी कप्तानी के दौरान बाबर आजम, शाहीन अफरीदी, हसन अली और दूसरे खिलाड़ियों को मैच-विनर बनते देखना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।



