जल जीवन मिशन घोटाला : सुबोध अग्रवाल की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित

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जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा जल जीवन मिशन में 979 करोड़ 27 लाख रुपए के फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर देने के मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव (पीएचईडी) सुबोध अग्रवाल की जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।

मामले की सुनवाई न्यायाधीश राजेन्द्र शर्मा ने की। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने फैसला 29 मई तक सुरक्षित रख लिया। सरकार की ओर से लोक अभियोजक आलोक और शालिनी गौतम ने पैरवी की, जबकि सुबोध अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता एसएस होरा ने पक्ष रखा।

एसीबी ने सुबोध अग्रवाल को नौ अप्रैल को गिरफ्तार किया था। मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित कई आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं। फरार आरोपी जितेन्द्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। मामले में सुबोध अग्रवाल सहित चार आरोपियों के खिलाफ 13 मार्च को स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हुए थे। एसीबी ने प्राथमिक जांच के बाद 30 अक्टूबर 2024 को प्राथमिकी दर्ज की थी।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश शर्मा ने अपने काफिले में कारों की संख्या घटाई

राजस्थान हाईकेोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अपने सुरक्षा काफिले में कारों की संख्या घटाकर एक कर दी है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने आज जोधपुर से जयपुर के बीच यात्रा के दौरान कार कम करने का निर्णय किया। इससे पहले उनके साथ चार गाड़ियों का काफिला चलता था, लेकिन अब इसे घटाकर एक कार तक सीमित कर दिया गया है।

इस पहल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईंधन बचत आग्रह से जोड़कर देखा जा रहा है। राज्य सरकार और कई विभाग भी पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए नये कदम उठा रहे हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय प्रशासन ने भी ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कारों की संख्या कम करने जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की इस पहल को आम लोगों और सरकारी अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश है कि छोटी-छोटी पहल से बड़े बदलाव संभव हैं।