जयपुर/उदयपुर। उदयपुर के चर्चित कन्हैया लाल हत्याकांड से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने पांच आरोपियों को फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की ओर से दायर अलग-अलग जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने वर्ष 2024 में विशेष एनआईए अदालत, जयपुर की ओर से जमानत से इनकार किए जाने के आदेशों को भी बरकरार रखा।
अभियोजन के साक्ष्यों पर अदालत ने किया विचार
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से लंबे समय से जेल में रहने और मुकदमे की प्रक्रिया में लग रहे समय का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क रखा कि आरोपियों के खिलाफ घटना स्थल पर सीधे मौजूदगी का स्पष्ट साक्ष्य नहीं है और अभियोजन द्वारा कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा अन्य सामग्रियों पर भरोसा किया जा रहा है।
वहीं राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से आरोपियों की कथित भूमिका को एक पूर्व नियोजित साजिश से जोड़ते हुए जमानत का विरोध किया गया। एजेंसी के अनुसार मामले में कॉल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और बरामदगी सहित अन्य साक्ष्य जांच का हिस्सा हैं।
ट्रायल की गति को भी माना अहम
रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि मामले की सुनवाई आगे बढ़ रही है। ट्रायल के दौरान गवाहों की संख्या 180 से घटाकर 89 की गई है और करीब 30 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। इसी आधार पर अदालत ने लंबे समय से चल रही हिरासत को जमानत का पर्याप्त आधार नहीं माना।
कन्हैया लाल की 28 जून 2022 को उदयपुर में उनकी दुकान के भीतर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी। NIA ने मामले में कई आरोपियों के खिलाफ IPC, UAPA और Arms Act की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की। वर्ष 2024 में विशेष NIA अदालत ने नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे।
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन को इस मामले में फिलहाल जमानत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई विशेष एनआईए अदालत में जारी है।



