छात्राओं ने सीखी भारतीय संस्कृति की कलात्मक अभिव्यक्ति
अजमेर। विविधा कला एवं सांस्कृतिक संस्था तथा अजमेर कथक कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को तोपदड़ा स्थित ड्रीमलैण्ड पब्लिक स्कूल में एक दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में छात्राओं को कथक नृत्य की तकनीकी, कलात्मक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं से परिचित कराया गया।
संस्था की निदेशक दृष्टि राय ने छात्राओं को कथक के क्रियात्मक एवं कलात्मक पक्ष की जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति, सांस्कृतिक विरासत और भावाभिव्यक्ति का सशक्त स्वरूप है। उन्होंने बताया कि नृत्य भारतीय समाज की आत्मा है, जो धर्म, कला और जीवन को एक सूत्र में पिरोता है तथा ईश्वर से जुड़ने और पौराणिक कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम भी है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि योग प्रशिक्षक अनिता लालवानी (खुराना) ने अपने संबोधन में कहा कि नृत्य और योग दोनों ही शरीर एवं मन को स्वस्थ रखने के प्रभावी साधन हैं। नियमित नृत्य से शारीरिक स्फूर्ति के साथ मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास भी विकसित होता है।
अजमेर कथक कला केन्द्र की स्थापना के 15 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में शहर के विभिन्न विद्यालयों में कथक नृत्य कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में ड्रीमलैण्ड पब्लिक स्कूल में आयोजित इस कार्यशाला में केन्द्र की वरिष्ठ छात्रा सोनम सोलंकी ने कथक नृत्य में प्रयुक्त विभिन्न मुद्राओं, ताल एवं भावाभिनय की बारीकियों का प्रदर्शन करते हुए छात्राओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
कार्यशाला में 50 से अधिक छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समापन पर सभी प्रतिभागी छात्राओं को अजमेर कथक कला केन्द्र की ओर से प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
इससे पूर्व विद्यालय के निदेशक दीपक चावड़ा व गौरव चावड़ा ने संस्था की निदेशक दृष्टि राय का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में सोनम सोलंकी, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं तथा समस्त स्टाफ उपस्थित रहे।



