चेन्नई। महान पार्श्व गायिका जमुना रानी का गुरुवार को बेंगलुरु में निधन हो गया। इसके साथ ही फिल्म जगत के श्वेत एवं श्याम दौर की श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाली मधुर आवाज सदा के लिए खामोश हो गई। वे 88 वर्ष की थीं। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को संपन्न हुआ।
प्रसिद्ध पार्श्व गायिका जमुना रानी का निधन संगीत और सिनेमा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अपनी शहद जैसी मीठी और सुरीली आवाज से लोगों के दिलों को छू लेने वाली जमुना ने श्रोताओं की कई पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया और भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्ण युग में अपनी एक खास पहचान बनाई।
आंध्र प्रदेश में 1938 में जन्मी रानी का संगीत से परिचय बहुत छोटी उम्र में उनकी मां के मार्गदर्शन में हुआ था। उनकी मां खुद एक कुशल वायलिन वादक थीं। उनकी सहज संगीतमय प्रतिभा कम उम्र में ही निखर गयी थी। महज चार वर्ष की उम्र तक वह अपने गायन के लिए प्रशंसा बटोरने लगी थीं। सिनेमा में उनकी यात्रा 1946 में चित्तूर नागय्या के संगीतबद्ध तेलुगु फिल्म ‘त्यागय्या’ से शुरू हुई थी।
तमिल सिनेमा में उनका पदार्पण 1952 में फिल्म ‘वलयापति’ से हुआ, जिसमें टीएम सौंदरराजन के साथ गाये उनके गीत ने लोगों पर अमिट छाप छोड़ी। इसके बाद वे तेजी से लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचीं और फिल्म ‘कल्याणी’ के उनके चर्चित गीत ‘सक्सेस सक्सेस’ ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई।
वर्ष 1953 में उन्होंने फिल्म ‘देवदास’ में एक बाल कलाकार के लिए ‘ओह देवदास’ गाकर ऐतिहासिक उपलब्घि हासिल की और इस तरह से तमिल सिनेमा में बाल पात्रों के लिए आवाज देने वाली शुरुआती पार्श्व गायिकाओं में से वह एक बन गईं। यह एक ऐसी उपलब्धि थी, जिसने उनकी उल्लेखनीय विरासत को और बढ़ा दिया।
ऐसे समय में जब एमएस सुब्बुलक्ष्मी और पी सुशीला जैसी दिग्गज हस्तियां संगीत जगत पर हावी थीं, रानी अपनी अनूठी अभिव्यक्तिपूर्ण और मनमोहक आवाज के साथ अलग नजर आईं। उनके पास हर बोल में जान फूंकने की दुर्लभ क्षमता थी, जिससे हर गाना श्रोताओं के दिलों में गहराई से उतर जाता था।
उनके सबसे पसंदीदा और सदाबहार गीतों में सक्सेस सक्सेस, ओह देवदास, पाट्टोंड्रु केट्टेन परवसामानैन (पासमलार), आसयुम नेसमुम (कुलेबगावली), यारादी नी मोहिनी (उत्तम पुथिरन), कात्तिल मरम उरंगुम (कवलै इल्लाद मनिथन), सेंतमिल थेनमोझियाल (मालैयिट्ट मंगई), कुंगुमपू पूवे (मरगदम), मामा मामा मामा (कुमुदम) शामिल हैं, जो कई अन्य गानों के साथ आज भी समय के साथ गूंज रहे हैं।
अपने शानदार करियर के दौरान, उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और सिंहल सहित कई भाषाओं में 6,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए। कला में उनके अपार योगदान को तमिलनाडु सरकार के प्रतिष्ठित कलाईमामणि पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।



