अजमेर वार्ड 78 में ‘बाहरी’ चेहरे का मुद्दा, वार्ड 76 में निर्दलियों ने भाजपा की पेशानी पर डाले बल

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अजमेर। अजमेर नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने पंचशील नगर से जुड़े वार्डों में स्थानीय बनाम संगठन और प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ के सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है। खास तौर पर वार्ड 78 में भाजपा की वरिष्ठ नेत्री भारती श्रीवास्तव की हार और वार्ड 76 में भाजपा के सतीश बंसल की जीत के बीच का अंतर स्थानीय चुनावी समीकरणों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों के परिणाम में कांग्रेस 37, भाजपा 32 और निर्दलीय 11 सीटों पर विजयी रहे हैं।

वार्ड 78 में ‘बाहरी प्रत्याशी’ की चर्चा

वार्ड 78 में भाजपा ने भारती श्रीवास्तव को प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस की ओर से हमीद चीता मैदान में थे। चुनाव से पहले भारती श्रीवास्तव का क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क और प्रचार अभियान भी सामने आया था। इसके बावजूद परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं गया। उपलब्ध चुनावी रिपोर्टों के अनुसार हमीद चीता ने करीब 331 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

इस हार की राजनीतिक व्याख्या में सबसे अधिक चर्चा स्थानीय बनाम बाहरी प्रत्याशी के मुद्दे की हो रही है। वार्ड स्तर के चुनाव में मतदाता अक्सर पार्टी के साथ-साथ प्रत्याशी की व्यक्तिगत पहचान, क्षेत्र में उपलब्धता और स्थानीय संपर्क को भी महत्व देते हैं। ऐसे में भाजपा संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के प्रयास के बावजूद यदि प्रत्याशी के साथ मतदाताओं का सीधा जुड़ाव अपेक्षित स्तर पर नहीं बन पाया, तो उसका असर मतदान पर पड़ना स्वाभाविक माना जा सकता है।

हालांकि, भारती श्रीवास्तव की हार का एकमात्र कारण ‘बाहरी’ होना मान लेना भी जल्दबाजी होगी। वार्ड 78 में भाजपा और कांग्रेस के अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में थे। इसलिए वोटों का बंटवारा और स्थानीय सामाजिक समीकरण भी परिणाम को प्रभावित करने वाले कारक रहे होंगे। चुनाव से पहले वार्ड 78 में भाजपा और कांग्रेस के अलावा कई निर्दलीय व बागी उम्मीदवार मैदान में थे।

वार्ड 76 में सतीश बंसल की चुनौतीपूर्ण जीत

वार्ड 76 का परिणाम भाजपा के लिए राहत देने वाला रहा, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यहां पार्टी प्रत्याशी सतीश बंसल को भी अपेक्षाकृत कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। वार्ड में भाजपा के सतीश बंसल को 753 वोट मिले, जबकि निर्दलीय मुकेश सिंह राठौड़ ने 449 वोट हासिल किए। कांग्रेस की इंदु शर्मा को 218, निर्दलीय पूजा को 233 और निर्दलीय सतीश कुमार वर्मा को 211 मत मिले।

इस तरह बंसल और राठौड़ के बीच जीत का अंतर 304 वोट रहा। खास बात यह है कि कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे स्थान पर नहीं रहे, बल्कि निर्दलीय मुकेश सिंह राठौड़ ने भाजपा को सीधी चुनौती दी। वार्ड 76 में कुल पांच प्रत्याशी मैदान में थे।

निर्दलीयों के वोटों ने बदला गणित

वार्ड 76 में तीन निर्दलीय प्रत्याशियों को कुल 893 वोट मिले, जो भाजपा प्रत्याशी के 753 वोट से भी अधिक हैं। यदि निर्दलीय वोट एक ही प्रत्याशी के पक्ष में एकजुट होते तो मुकाबले का गणित पूरी तरह बदल सकता था। यही कारण है कि सतीश बंसल की जीत के बावजूद वार्ड 76 के परिणाम को भाजपा के लिए पूरी तरह एकतरफा जीत नहीं माना जा सकता।

वार्ड 76 में पंचशील नगर के ए, बी और सी ब्लॉक, हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र तथा गणेश गुवाड़ी जैसे इलाके शामिल हैं। चुनाव से पहले भी स्थानीय निवासी मुकेश सिंह राठौड़ की वजह से गणेश गुवाड़ी के वोटों को मुकाबले में महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

वार्ड 76 ने दिया भाजपा को संदेश

2021 के चुनाव में भी वार्ड 76 भाजपा के पक्ष में रहा था। उस समय भाजपा के अतीश माथुर ने कांग्रेस प्रत्याशी को करीब 860 मतों से हराया था। इस बार भी भाजपा सीट बचाने में सफल रही, लेकिन जीत का स्वरूप बदला हुआ दिखाई दिया।

दोनों वार्डों के परिणामों को साथ रखकर देखें तो तस्वीर यह बनती है कि सिर्फ पार्टी का मजबूत संगठन या परंपरागत वोट बैंक पर्याप्त नहीं है। स्थानीय पहचान, व्यक्तिगत जनसंपर्क और टिकट चयन भी वार्ड चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। वार्ड 78 में भाजपा को जहां प्रत्याशी की स्थानीय स्वीकार्यता के सवाल का सामना करना पड़ा, वहीं वार्ड 76 में निर्दलीय प्रत्याशी ने पार्टी के मजबूत आधार के बावजूद मुकाबले को रोचक बना दिया।