भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब 21 साल के लंबे अंतराल के बाद सार्वजनिक बस परिवहन व्यवस्था की नए स्वरूप में वापसी हो गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ और ‘पीएम ई-बस सेवा’ का शुभारंभ किया। इस मौके पर सात शहरों के लिए 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित राज्य सरकार के मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री मोहन यादव और खंडेलवाल ने टिकट लेकर बस में सफर भी किया।
सात शहरों से शुरू हुआ बसों का सफर
पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को नई बस सेवा से जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन बेहतर करने के साथ इंटरसिटी कनेक्टिविटी बढ़ाना और आगे चलकर ग्रामीण क्षेत्रों को भी नियमित बस नेटवर्क से जोड़ना है।
नई व्यवस्था की खास बात यह है कि बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों के माध्यम से होगा, जबकि सरकार रूट, बसों की लोकेशन और समयबद्ध संचालन की निगरानी करेगी। इस तरह 21 साल पहले बंद हुई पुरानी राज्य परिवहन व्यवस्था के बजाय सार्वजनिक परिवहन का नया मॉडल अपनाया गया है।
2005 में बंद हो गया था राज्य सड़क परिवहन निगम
मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (MPSRTC) को लगातार घाटे और बढ़ते कर्ज के बाद वर्ष 2005 में बंद कर दिया गया था। उस समय निगम पर करीब 756 करोड़ रुपए का कर्ज और लगभग पांच करोड़ रुपए मासिक घाटा होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद प्रदेश में बस परिवहन मुख्य रूप से निजी ऑपरेटरों पर निर्भर हो गया था। अब करीब दो दशक बाद राज्य सरकार ने नियोजित और निगरानी आधारित सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की ओर कदम बढ़ाया है।
2031 तक 15 हजार बसों का नेटवर्क बनाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस सेवा को चरणबद्ध तरीके से पूरे मध्यप्रदेश में विस्तार देने की योजना बनाई है। लक्ष्य है कि वर्ष 2031 तक करीब 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार हो। इसके लिए हर साल लगभग ढाई से तीन हजार नई बसों को व्यवस्था में शामिल करने की योजना बताई गई है।
योजना के विस्तार के साथ ग्रामीण इलाकों और ग्राम पंचायतों को नजदीकी शहरों तथा प्रमुख परिवहन केंद्रों से जोड़ने पर भी जोर रहेगा। सरकार ने 2031 तक प्रदेश की बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों तक बस कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी बसें
नई परिवहन व्यवस्था में यात्री सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। बसों में जीपीएस और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है, जिससे वाहनों की निगरानी और आपात स्थिति में यात्रियों की सहायता आसान हो सकेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नई परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। गांवों को शहरों से जोड़ने के साथ धार्मिक और महत्वपूर्ण स्थानों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की भी योजना है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सार्वजनिक परिवहन को आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आधुनिक बस सेवाओं से विशेष रूप से उन यात्रियों को सुविधा मिलेगी, जिनके लिए निजी टैक्सी या अन्य महंगे परिवहन साधनों का नियमित उपयोग संभव नहीं है।
करीब 21 साल बाद सार्वजनिक बस परिवहन की इस वापसी को मध्यप्रदेश की परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पुराना राज्य परिवहन निगम वापस नहीं आया है, बल्कि निजी संचालन और सरकारी निगरानी वाला नया मॉडल अपनाया गया है। अब इस व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा बसों की नियमितता, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, किराए और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर होगी।



