मोदी ने की जल संरक्षण की अपील, सीतामढ़ी के प्लास्टिक से बनी बेंच की तारीफ

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोगों से जल संरक्षण और एक पेड़ मां के नाम अभियान से जुड़ने की अपील की तथा बिहार से सीतामढ़ी में प्लास्टिक से बेंच तैयार करने के प्रयासों की सराहना की।

मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडिया कार्यक्रम मन की बात में 4 जुलाई से शुरू कैच द रेन अभियान को जनांदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा कि जहां और जब बारिश हो, वहीं उस पानी का संरक्षण करें। उन्होंने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जलाशयों के पुनर्जीवन तथा वृक्षारोपण को नयी गति दी जा रही है। उन्होंने अभियान में लोगों की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि कहीं पुराने तालाबों की गाद निकाली जा रही है, तो कहीं कुओं और बावड़ियों का पुनरुद्धार किया जा रहा है। जो बोरवेल अब उपयोग में नहीं हैं, उन्हें भूजल पुनर्भरण के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने मध्य प्रदेश के सीधी जिले, महाराष्ट्र के नासिक, आंध्र-प्रदेश के नंद्याल, छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र-प्रदेश के विजयनगरम तालाबों को फिर से जीवित करने की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आइए, हम भी अपने आस-पास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लें-पानी की हर बूंद बचाएं। आज बचाई गई हर बूंद, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।

प्रधानमंत्री ने बिहार के सीतामढ़ी में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक ही बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के कूड़े से निपटने के लिए स्थानीय लोगों ने प्रशासन की मदद से कचरे की रिसाइकिलिंग कर उससे आकर्षक बेंच बनाने का काम शुरू किया है। एक बेंच तैयार होने में करीब 40 किलोग्राम प्लास्टिक खप जाती है। यह मजबूत, टिकाऊ और आरामदायक होने के साथ-साथ पर्यावरण को नुकसान से भी बचाती है। इसे सरकारी स्कूलों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जाता है।

मोदी ने कहा कि इसके जरिये लोगों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। इस प्रयास में स्थानीय इकाई के साथ ही जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

एक पेड़ मां के नाम अभियान की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने लोगों से इससे जुड़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद के भाड़ज़ क्षेत्र में एक घंटे के भीतर साढ़े तीन लाख से अधिक पौधे रोपे गए। पच्चीस हजार से अधिक स्कूली बच्चों, एनसीसी कैडेट, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों का यह प्रयास गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। आने वाले वर्षों में यही पौधे एक घने शहरी वन का रूप लेंगे।

प्रधानमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में भी इस अभियान के तहत एक ही दिन में 12 जुलाई को 35 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। उन्होंने बताया कि राज्य का सांसद होने के नाते यह उनके लिए विशेष गर्व की बात है। पेड़ केवल मनुष्यों के लिए नहीं होते, वे अनगिनत जीवों के घर भी होते हैं।

मोदी ने गुजरात के गिर के जंगलों में करीब 60 साल बाद इंडियन ग्रे हॉर्नबिल के लौटने का भी जिक्र किया और कहा कि यह गिर में वर्षों से हो रहे संरक्षण और पुनर्स्थापन के प्रयासों का परिणाम है। हॉर्नबिल को जंगलों का किसान कहा जाता है। वे फल खाते हैं और बीजों को दूर-दूर तक पहुंचाते हैं। उन्हीं बीजों से जंगल में नए पेड़ उगते हैं। इस तरह वे जंगल को फिर से हरा-भरा बनाने में मदद करते हैं।