आजादी के बाद नेताजी के योगदान को भुलाने की कोशिश की गई : मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को यहां पराक्रम दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अडिग साहस, अटल संकल्प तथा राष्ट्र के प्रति उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका निडर नेतृत्व एवं देशभक्ति का गहरा भाव आने वाली पीढ़ियों को मजबूत भारत बनाने के लिए प्रेरित करता है।

मोदी ने कांग्रेस का नाम लिये बिना कहा कि देश पर लंबे समय तक शासन करने वाले लोगों ने नेताजी के गौरवपूर्ण योगदान को भुलाने का प्रयास किया क्योंकि यह उनके एजेंडा में फिट नहीं बैठता। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि नेताजी के जीवन ने उन्हें हमेशा बहुत प्रेरित किया है।

उन्होंने याद किया कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने 23 जनवरी 2009 को राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कायापलट करने वाली अग्रणी योजना ई-ग्राम विश्वग्राम शुरु की थी। उन्होंने कहा कि यह योजना हरिपुरा से शुरू की गई थी जिसका नेताजी बोस के जीवन में विशेष स्थान था। प्रधानमंत्री ने हरिपुरा के लोगों द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत और उसी सड़क पर आयोजित की गई शोभायात्रा को भी याद किया जिस पर कभी नेताजी चले थे।

मोदी ने कहा कि वर्ष 2012 में आज़ाद हिंद फौज दिवस मनाने के लिए अहमदाबाद में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में नेताजी बोस से प्रेरित कई लोग उपस्थित थे जिनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी. ए. संगमा भी शामिल थे।

आजादी के बाद देश पर शासन करने वालों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिये कहा कि नेताजी के गौरवपूर्ण योगदान को याद करना उन लोगों के एजेंडा में फिट नहीं बैठता था जिन्होंने दशकों तक राष्ट्र पर शासन किया और उन्हें भुलाने का प्रयास किया गया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मौजूदा शासन भिन्न है और उसकी तरफ से हर संभव अवसर पर नेताजी के जीवन और आदर्शों को लोकप्रिय बनाने के प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम नेताजी से संबंधित फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना था।

प्रधानमंत्री ने याद किया कि साल 2018 दो कारणों से एक ऐतिहासिक वर्ष था। उस वर्ष आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ लाल किले पर मनाई गई, जहां उन्हें तिरंगा फहराने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने इस अवसर पर आईएनए के वरिष्ठ नेता ललती राम जी के साथ अपनी बातचीत को भी याद किया।

मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्रीविजयपुरम (तत्कालीन पोर्ट ब्लेयर) में नेताजी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर वहां तिरंगा फहराया। साथ ही उन्होंने कहा कि अंडमान में तीन प्रमुख द्वीपों के नाम बदले गए हैं जिनमें रॉस द्वीप भी शामिल है, जिसे अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप के नाम से जाना जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लाल किले में स्थित क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी बोस और इंडियन नेशनल आर्मी से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री रखी गई है जिसमें नेताजी द्वारा पहनी गई टोपी भी शामिल है। उन्होंने बताया कि यह नेताजी के ऐतिहासिक योगदान के ज्ञान को संरक्षित करने और उसे गहरा करने के प्रयासों का हिस्सा है।

मोदी ने कहा कि नेताजी के सम्मान में उनकी जयंती को पराक्रम दिवस घोषित किया गया है। इसके अलावा औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़ने के संकल्प और नेताजी के प्रति श्रद्धा का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में इंडिया गेट के बराबर में नेताजी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गयी है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।