
सबगुरु न्यूज-सिरोही। 18 वी लोकसभा के सात सत्रों में संसद में परफॉर्मेंस के मामले में राजस्थान के जोधपुर संभाग के सांसदों में अभी भी पाली के सांसद पीपी चौधरी बेस्ट हैं तो फिर जालोर-सिरोही के सांसद सांसद रत्न कैसे बन गए? इनके अलावा भी संसद में कई सारे बेस्ट परफॉर्मर है। पीपी चौधरी की संसद में अटेंडेंस 99%, उनके द्वारा 47 डिबेट में हिस्सा लिया गया वहीं 269 सवाल संसद में पूछे गए। जबकि लुंबाराम चौधरी की लोकसभा में उपस्थिति 98%, 36 डिबेट में हिस्सा लिया और 246 सवाल पूछे गए। तो ऐसा कैसे हुआ कि लुंबाराम चौधरी को सांसद रत्न सम्मान दिया गया।
इसे समझने के लिए ये समझ लीजिए कि ये सम्मान संसद सचिवालय के द्वारा दिया जाने वाला आधिकारिक या सरकारी सम्मान नहीं है। ये एक एनजीओ के द्वारा दिए जाने वाला सम्मान है। जिसमें ओवर ऑल परफॉर्मेंस की बजाय सिलसिलेवार एक-एक सांसद को सम्मानित कर दिया जाता है। पीपी चौधरी लगातार बेस्ट परफार्मर रहे हैं, इसलिए उनको इस संस्थान ने पिछले साल राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ के साथ सम्मानित कर दिया था। ये बात अलग है कि शायद उन दोनों ने इसे उस तरह मास्टर स्ट्रोक की तरह नहीं दिखाया था जिस तरह से लुंबाराम चौधरी की पीआर टीम दिखा रही है।
इस बार भी पीपी चौधरी ही बेस्ट परफार्मर हैं, लेकिन उन्हें पिछली बार सम्मानित कर दिया था इसलिए उनको सम्मानित नहीं किया गया। यदि ये सरकार के द्वारा दिया सम्मान होता तो भी ही कितनी भी बार सम्मानित हों, राजस्थान विधानसभा की तरह हर बार रिपीट भी हो सकता है।
– 246 में से इतने सवाल सिरोही जालोर के
लुंबाराम चौधरी को जिस कालक्रम के लिए इस एनजीओ ने चुना है उसमें उन्होंने 246 सवाल पूछे। भारत में सांसदों और विधायकों की परफॉर्मेंस पर नजर रखने वाली एकमात्र संस्थान पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के डेटा के आधार पर ही चेन्नई स्थित एक एनजीओ प्राइम फाउंडेशन सिलसिलेवार ये घोषणा करती है। इसी पीआरएस के डेटा के अनुसार लुंबाराम चौधरी ने जिनमें से करीब 36 सवाल ऐसे हैं जिसमें सिरोही जालोर के मुद्दों को जिक्र हुआ है और सिंगल सवाल पूछने का मौका मिला है। इसके अलावा शेष सारे सवाल क्लब हैं। जिनमें पांच से 25 सांसदों तक के कॉमन नाम हैं।
इनमें से कई मुद्दे तो ऐसे हैं जिनका सिरोही-जालोर तो क्या राजस्थान से भी कोई वास्ता नजर नहीं आ रहा है। ये पूरा एक कॉमन पैटर्न है जिसमें सिर्फ स्कीमों के सवाल हैं और इन बाकी सवालों के आधार पर भविष्य में जालोर, सिरोही या राजस्थान में सम्भावित कामों के संबंध में अनुपूरक मांग के मुद्दे भी दिखाई नहीं दिए। सिरोही जालोर से जुड़े करीब 40 सवालों में रेलवे, मानपुर हवाई पट्टी, रेलवे, जालोर में ट्रेनों, मंदिरों और फोर्ट के पुनरुद्धार जैसे मुद्दे हैं।
– डिबेट में से ज्यादा इस मुद्दे पर बात
पीआरएस इंडिया ने अपने डेटा में लुंबाराम चौधरी के जून 2024 से अप्रैल 2026 तक के सात सेशन के कामों का जिक्र किया है। इसके अनुसार संसद में अनुपूरक मांगों, नियम 377, विशेष सत्रों आदि में हुई बहसों में लुंबाराम चौधरी को 36 बार बोलनेरका मौका मिला। इसमें लुंबाराम चौधरी ने अकेले रेलवे से संबंधित मामलों को 12 बार रखा। वहीं किसानों के खाद और बीमा आदि से संबंधित मामलों को करीब 8 बार, कडाना बांध के मुद्दा 6 बार, मानपुर हवाई पट्टी पर तीन बार सदन में अपनी बात रखी। इसके अलावा दोनों जिलों से संबंधित सात अलग-अलग मामलों को सदन में रखा।
– एक मजबूरी ये भी
लुंबाराम चौधरी द्वारा उठाए है 246 सवालों में से अधिकांश सवाल ऐसे हैं जो राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं। क्रूज भारत स्कीम, इंडिया डिप्लोमैटिक प्रेजेंस इन अफ्रीका, भारत यूरोपियन यूनियन माइग्रेशन कॉपरेशन, पीएलआई, समेत डेढ़ सौ से ज्यादा ऐसे मुद्दे थे जिनका राजस्थान और सिरोही जालोर से कोई लेना देना नहीं। सोशल मीडिया पर वीबी जीराम जी के एब्रेवशन के मामले में अटकने वाले सांसद के द्वारा इतने दुरूह और कॉम्प्लिकेटेड मुद्दों पर सवाल पूछना वाकई लोकसभा के लिए गौरव की बात है, बशर्ते कि इन सब मुद्दों पर इनका होमवर्क पूरा हो। दरअसल, विधानसभा से विपरीत लोकसभा सदस्यों की एक मजबूरी होती है कि वो स्थानीय स्तर के सवाल सीधे नहीं पूछ सकते। इसलिए इन चालीस सवालों में से आधा दर्जन सवालों को छोड़कर शेष मामलों में सिरोही जालोर का जिक्र देश या राजस्थान के अन्य इलाकों के संदर्भ में पूछे गए सवालों मेें घुसा कर पूछा गया। इनमें से भी कई सवालों के पूरे जवाब नहीं दिखे।


