बनेवड़ा में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 5 अगस्त से जन आंदोलन

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बनेवड़ा। सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2022 में साइकिल यात्रा निकालकर जन-जागरूकता की मिसाल कायम करने वाला बनेवड़ा गांव एक बार फिर आंदोलन की राह पर है। इस बार ग्रामीणों ने सड़क नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। विद्यालय में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से नाराज ग्रामीणों ने 5 अगस्त 2026 से विद्यालय के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण जन आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।

बनेवड़ा संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि गांव के राजकीय बालिका विद्यालय को आठवीं से क्रमोन्नत कर सीनियर सेकेंडरी विद्यालय का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो पर्याप्त कक्षाओं का निर्माण कराया गया और न ही विभिन्न विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति की गई। ऐसे में विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है और छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है।

समिति का कहना है कि सरकार की ओर से शिक्षा के अधिकार और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। विद्यालय में कई विषयों के शिक्षक नहीं हैं, जबकि कक्षाओं के संचालन के लिए पर्याप्त कमरे भी उपलब्ध नहीं हैं। इससे छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

ये हैं प्रमुख मांगें

संघर्ष समिति ने प्रशासन के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी हैं। प्रत्येक कक्षा एवं विषय के लिए स्थायी शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति की जाए। विद्यालय में पर्याप्त संख्या में कक्षाओं का निर्माण कर आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

2022 की तर्ज पर फिर होगा आंदोलन

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2022 में सड़क निर्माण की मांग को लेकर हुए आंदोलन में पूरे गांव ने एकजुट होकर सफलता हासिल की थी। अब उसी तरह शिक्षा के मुद्दे पर भी ग्रामीण एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। आंदोलन को लेकर गांव में जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

समिति की ओर से जारी नारों में बेटी पढ़ाओ कहते हो, पर पढ़ाने वाला टीचर नहीं देते, हम पढ़ेंगे, पर खाली कमरे में नहीं तथा साइकिल पर निकले थे सड़क के लिए, अब पैदल चलेंगे टीचर के लिए जैसे संदेश लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

धरने की रूपरेखा भी तय

संघर्ष समिति ने बताया कि 5 अगस्त को विद्यालय के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा। यदि इसके बाद भी प्रशासन ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए मुख्य शिक्षा ब्लॉक अधिकारी, श्रीनगर कार्यालय के बाहर भी धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और तब तक जारी रहेगा, जब तक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक, कक्षाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा दी जातीं। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि वह आंदोलन शुरू होने से पहले समाधान निकालता है या फिर अभिभावकों और ग्रामीणों को धरने पर बैठने के बाद ही उनकी मांगों पर निर्णय लिया जाएगा।