श्रीलंका में राजपक्षे परिवार पर भ्रष्टाचार जांच का शिकंजा, पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी समेत 3 तीन अरेस्ट

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कोलंबो। श्रीलंका में भ्रष्टाचार के पुराने मामलों की जांच एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच करने वाली Commission to Investigate Allegations of Bribery or Corruption (CIABOC) ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की पत्नी और पूर्व प्रथम महिला शिरांती राजपक्षे, पूर्व मंत्री रोहित बोगोलागामा तथा नेशनल सेविंग्स बैंक (NSB) के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप करियावासम को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया।

शिरांती राजपक्षे की गिरफ्तारी एक चैरिटी संगठन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में हुई है। वहीं बोगोलागामा और करियावासम के खिलाफ कार्रवाई अलग-अलग कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई है। इन गिरफ्तारियों के साथ श्रीलंका में कभी बेहद प्रभावशाली रहे राजपक्षे परिवार और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार जांच फिर चर्चा में आ गई है।

बच्चों के अस्पताल के लिए जुटाई गई रकम पर सवाल

शिरांती राजपक्षे के खिलाफ जांच का केंद्र सिरिलिया साविया नामक संगठन से जुड़ी करीब 1 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की राशि है। यह रकम राष्ट्रीय बचत बैंक से जुड़ी प्रक्रिया के माध्यम से बच्चों के अस्पताल में स्कैनर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जुटाई गई थी।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि कोलंबो के लेडी रिजवे हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रन के लिए सीटी स्कैनर उपलब्ध कराने के नाम पर रकम प्राप्त की गई, लेकिन अस्पताल को मशीन उपलब्ध नहीं कराई गई और धन के कथित दुरुपयोग की स्थिति बनी। CIABOC ने शिरांती पर सरकारी धन से जुड़े कानून और भ्रष्टाचार संबंधी प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, जिस स्कैनर के लिए धन जुटाया गया था, उस तरह की मशीन पहले ही चीन सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद संबंधित चैरिटी के माध्यम से धन जुटाने और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि शिरांती राजपक्षे ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।

घर से गिरफ्तारी, करीब दो घंटे हुई पूछताछ

73 वर्षीय शिरांती राजपक्षे को बुधवार सुबह कोलंबो के किरुलापोन स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से पहले जांच अधिकारियों ने उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद उन्हें भ्रष्टाचार जांच आयोग के कार्यालय ले जाया गया।

उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब वह हाल ही में विदेश से श्रीलंका लौटी थीं। वह चिकित्सा उपचार के लिए सिंगापुर गई थीं और सोमवार रात देश वापस पहुंची थीं। उनकी वापसी से पहले उनके वकीलों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग को लेकर अदालत का रुख भी किया था।

अदालत ने 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा

गिरफ्तारी के बाद शिरांती राजपक्षे को कोलंबो की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दूसरी ओर, इसी मामले से जुड़े पूर्व नेशनल सेविंग्स बैंक अध्यक्ष प्रदीप करियावासम को अदालत ने जमानत दे दी।

करियावासम पर आरोप है कि बैंक के अधिकारी के रूप में उन्होंने निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया का पालन किए बिना संबंधित धन को चैरिटी संगठन से जुड़े खाते में स्थानांतरित करने में कथित रूप से मदद की। अदालत ने उन्हें दो जमानतदारों के साथ जमानत दी और उनके विदेश यात्रा पर भी रोक लगाई है।

पूर्व मंत्री रोहित बोगोलागामा भी अरेस्ट

इसी दिन CIABOC ने पूर्व मंत्री रोहित बोगोलागामा को भी भ्रष्टाचार के एक अलग मामले में गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के मुताबिक, बोगोलागामा जांच एजेंसी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे थे। पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

उनके खिलाफ मामला कथित तौर पर सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ा है। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद उन्हें भी कोलंबो की अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला उस समय से जुड़ा है जब बोगोलागामा निवेश प्रोत्साहन से जुड़े मंत्री थे। जांच में लंदन में आयोजित एक निवेश प्रचार कार्यक्रम के लिए स्वीकृत राशि से अधिक सरकारी धन के इस्तेमाल की कथित अनियमितता की जांच की जा रही है।

राजपक्षे परिवार पर पहले भी कार्रवाई

शिरांती राजपक्षे की गिरफ्तारी श्रीलंका में राजपक्षे परिवार से जुड़े भ्रष्टाचार मामलों की लंबी श्रृंखला की नई कड़ी मानी जा रही है। पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे वर्ष 2005 से 2015 तक श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे। उनके कार्यकाल के दौरान राजपक्षे परिवार का देश की राजनीति में प्रभाव काफी बढ़ गया था।

वर्ष 2022 में श्रीलंका में आर्थिक संकट के दौरान बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। आर्थिक बदहाली, महंगाई और ईंधन तथा आवश्यक वस्तुओं की कमी के बीच महिंदा के भाई गोटबाया राजपक्षे को राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था।

वर्तमान राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की सरकार के दौरान पुराने भ्रष्टाचार मामलों की जांच दोबारा तेज किए जाने की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। इसी क्रम में राजपक्षे परिवार से जुड़े कई लोगों पर भी जांच का दबाव बढ़ा है।

बेटे नामल राजपक्षे भी जांच के घेरे में

शिरांती और महिंदा राजपक्षे के बड़े बेटे तथा विपक्षी सांसद नामल राजपक्षे भी अलग भ्रष्टाचार मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर श्रीलंकाई एयरलाइंस के एयरबस विमान सौदे से जुड़े कथित रिश्वत प्रकरण में जांच चल रही है।

परिवार के दूसरे बेटे योशिता राजपक्षे के खिलाफ भी भ्रष्टाचार से संबंधित कार्रवाई हो चुकी है और उन्हें जमानत मिली है। इस वजह से शिरांती की गिरफ्तारी को राजपक्षे परिवार के खिलाफ चल रही व्यापक भ्रष्टाचार जांच के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शिरांती ने आरोपों से किया इनकार

शिरांती राजपक्षे के वकील मनोज गमागे के मुताबिक, उनकी मुवक्किल ने लगाए गए आरोपों से इनकार किया है और वह कानूनी तौर पर मामले का सामना करेंगी। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि संबंधित धन चैरिटी संगठन के खातों में मौजूद है और उसका गबन नहीं हुआ है।

इसलिए फिलहाल जांच एजेंसी के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में अदालत के समक्ष पेश होने वाले साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से ही यह स्पष्ट होगा कि धन के इस्तेमाल में वास्तव में कोई आपराधिक अनियमितता हुई थी या नहीं।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की मुहिम को मिला नया मुद्दा

श्रीलंका में आर्थिक संकट के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। लंबे समय से सत्ता के केंद्र में रहे राजपक्षे परिवार के सदस्यों के खिलाफ पुराने मामलों की जांच आगे बढ़ना वर्तमान सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति के लिए भी अहम माना जा रहा है।

बुधवार की कार्रवाई में एक पूर्व प्रथम महिला, पूर्व मंत्री और सरकारी बैंक के पूर्व शीर्ष अधिकारी की गिरफ्तारी ने इस अभियान को और व्यापक बना दिया है। आने वाले दिनों में इन मामलों में अदालत की सुनवाई और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर श्रीलंका की राजनीति की नजर रहेगी।

हालांकि, गिरफ्तार किए गए सभी लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानूनी रूप से निर्दोष माने जाएंगे।