जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बढ़ते साइबर अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे हजारों निर्दोष लोग अपनी मेहनत की कमाई खो रहे हैं।
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंढ ने शनिवार को दो साइबर अपराधियों की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि इंटरनेट के माध्यम से होने वाले इन अपराधों से आम नागरिकों को बचाने के लिए एक मजबूत और प्रभावी तंत्र तैयार किया जाना अब आवश्यक हो चुका है।
ऑनलाइन बैंकिंग या किसी भी डिजिटल लेन–देन से पहले लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। इसके लिए प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, टेलीविजन और एफएम रेडियो के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि लोग डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकें।
उच्च न्यायालय ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सरल और तेज करने पर भी ज़ोर दिया। न्यायालय के अनुसार, शिकायत प्रणाली जटिल होने के कारण कई पीड़ित समय रहते मदद नहीं ले पाते, जिससे उनका पैसा वापस पाना कठिन हो जाता है।
अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों के वित्त एवं गृह मंत्रालयों, राजस्थान के पुलिस महानिदेशक और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया को निर्देश दिए हैं कि वे मिलकर ऐसा तंत्र विकसित करें, जिससे ग्राहकों की मेहनत की कमाई अनधिकृत लेन-देन से सुरक्षित रहे। साथ ही, न्यायालय ने ग्राहकों का डेटा बेचकर अपराधियों को फायदा पहुंचाने वाली सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए।
अदालत ने कहा कि साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुके हैं। ऐसे में सभी हितधारकों को मिलकर कदम उठाने होंगे, ताकि आम जनता सुरक्षित डिजिटल माहौल में लेन-देन कर सके।



