नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के अपमान के लिए दंड का प्रावधान करने से संबंधित राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक को राज्यसभा ने विपक्ष के बहिर्गमन के बीच बुधवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन के प्रस्ताव दिए थे लेकिन उनके सदन में मौजूद नहीं होने के कारण इन्हें पेश नहीं किया जा सका।
उप सभापति हरिवंश ने स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए विधेयक पर चर्चा शुरू करने को कहा। कांग्रेस सहित विपक्ष के सदस्यों ने गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने की मांग करते हुए शोर शराबा किया और बाद में वह सदन से बहिर्गमन कर गए। इससे पहले कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने विधेयक पर अपनी संक्षिप्त बात भी रखी। विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के संक्षिप्त जवाब के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
राय ने कहा कि यह केवल विधायी संशोधन नहीं बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के जानबूझ कर किए गए अपमान के लिए दंड का प्रावधान करना है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता सेनानियों की अमरगाथा का उद्घोष, राष्ट्र की गरिमा, साझा चेतना का प्रतीक, भारतीयों की भावना और मान सम्मान का विषय है। मंत्री ने वंदे मातरम् के संकल्प को एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प के अनुरूप बताते हुए कहा कि यह विकसित भारत का भी संकल्प है।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का विषय राजनीति से उपर होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर वंदे मातरम् का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह तुष्टीकरण के माध्यम से देश का अपमान करती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को यह पता होना चाहिए कि देश उनके इस रवैये को देख रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि 1937 में जवाहर लाल नेहरू ने कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर वंदे मातरम् को दो पैरे तक सीमित कर दिया था।
उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आजादी के बाद रेडियो पर वंदे मातरम् का पूर्ण गायन कराया था। इसके अलावा 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद ने संविधान सभा में कहा था कि वंदे मातरम् का जन गण मन के समान ही सम्मान किया जाएगा। यह विधेयक 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन करता है। यह कानून राष्ट्रीय ध्वज, देश के संविधान और राष्ट्रगान के अपमान के लिए सज़ा का प्रावधान करता है।
इस कानून में राष्ट्रगान (जन गण मन) के गायन को जानबूझकर रोकने या राष्ट्रगान गाने वाली सभा में रुकावट पैदा करने को दंडनीय अपराध बताया गया है और इनके लिए तीन वर्ष के कारावास, जुर्माने या दोनों सज़ा का प्रावधान करता है। दूसरी बार या उसके बाद जितनी बार भी इस तरह का अपराध साबित होगा इसके लिए कम से कम एक वर्ष के कारावास की सजा होगी। यह विधेयक इन प्रावधानों को अब राष्ट्रीय गीत (वंदे मातरम्) पर भी लागू करता है।
अभी वंदे मातरम् के गायन से संबंधित अपमान को रोकने के लिए कोई विशिष्ट विधिक प्रावधान नहीं है। यह संशोधन विधेयक इसलिए लाया गया है जिससे राष्ट्रीय गीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाया जा सके। विधेयक पारित किये जाने के बाद सदन में सदस्यों ने विशेष उल्लेख के तहत विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी जिसके बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।



