43 साल पुराने सिनेमा भूखंड विवाद में जेडीए को राहत

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जयपुर। राजस्थान में जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को 43 वर्ष पुराने सिनेमा भूखंड आवंटन विवाद में बड़ी कानूनी राहत मिली है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश नीतू भारद्वाज की अदालत ने आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई को चुनौती देते हुए दायर स्थायी निषेधाज्ञा का वाद खारिज कर दिया।

मामला शास्त्री नगर के सुभाष नगर क्षेत्र में सिनेमा निर्माण के लिए नीलामी के माध्यम से आवंटित भूखंड से जुड़ा है। गिरधर नगर, शाहीबाग, अहमदाबाद (गुजरात) निवासी ताराबेन और उनके पुत्र राजेश, हरीश और प्रदीप ने 30 अप्रैल 2018 को जेडीए के खिलाफ वाद दायर करके आवंटन निरस्तीकरण को चुनौती दी थी।

जेडीए की ओर से अधिवक्ता गोविन्द शर्मा एवं देवेन्द्र त्यागी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि वादियों ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर और न्यायालय को गुमराह करते हुए वाद प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि जेडीए ने 24 सितंबर 1985 को भूखंड का कब्जा पत्र जारी कर दिया था, जिसके अनुसार 15 दिन के भीतर निर्माण कार्य शुरू करना अनिवार्य था। निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किए जाने पर जेडीए ने 30 अगस्त 1988 को जमा राशि जब्त करते हुए नीलामी एवं आवंटन निरस्त कर दिया था।

जेडीए की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि वाद दायर करने से पूर्व आवश्यक वैधानिक नोटिस नहीं दिया गया। इसके अलावा वाद समय-सीमा से बाहर था। इस मामले की सुनवाई का अधिकार सिविल न्यायालय के बजाय जेडीए अधिनियम, 1982 की धारा 83 के तहत जेडीए अपीलीय अधिकरण को प्राप्त है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जेडीए के तर्कों को स्वीकार करते हुए वादियों की स्थायी निषेधाज्ञा संबंधी याचिका खारिज कर दी। जेडीए के अधिवक्ता गोविन्द शर्मा ने बताया कि विवादित भूखंड टीबी अस्पताल के निकट स्थित है। करीब पांच हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल वाली इस भूमि का वर्तमान बाजार मूल्य करीब दो हजार करोड़ रुपए आंका जा रहा है।